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मार्च, 3, 2026
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मंदार पर्वत पर अलौकिक साधना: जैन साध्वियों ने टेका 12वें तीर्थंकर के चरणों में माथा

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भागलपुर । बांका जिले में स्थित मंदार पर्वत की वादियां, जहां हर शिखर एक प्राचीन गाथा समेटे हुए है। इन दिनों यह पवित्र धरा एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठी, जब जैन साध्वियों का एक समूह पंच तीर्थ यात्रा के दौरान यहां पहुंचा। बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की तप, कैवल्य ज्ञान और निर्वाण स्थली पर हुई यह साधना, क्या सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान थी या इसके पीछे कुछ और गहरा रहस्य छिपा था?

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हाल ही में, अपनी पंच तीर्थ यात्रा के क्रम में जैन साध्वियों का एक दल बांका के मंदार पर्वत शिखर पर पहुंचा। यह यात्रा जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें वे विभिन्न पवित्र स्थलों का भ्रमण कर आत्मिक शांति और ज्ञान की प्राप्ति करते हैं। साध्वियों का यह दल भगवान वासुपूज्य स्वामी की पावन धरा पर पहुंचकर विशेष रूप से उत्साहित था।

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भगवान वासुपूज्य स्वामी की तपस्थली

जैन धर्म के बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की महिमा अप्रतिम है। मंदार पर्वत शिखर को उनकी तप, कैवल्य ज्ञान और निर्वाण स्थली के रूप में जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर उन्होंने कठोर तपस्या कर कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया था और अंततः यहीं से मोक्ष की प्राप्ति की। यह स्थल जैन धर्मावलंबियों के लिए श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र है।

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साध्वियों के दल ने भगवान वासुपूज्य स्वामी के पवित्र चरणों के समक्ष बैठकर गहन ध्यान साधना की। इस दौरान उन्होंने मंत्रोच्चारण और आत्मचिंतन के माध्यम से अपनी आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास किया। यह क्षण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान और आंतरिक शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

अध्यात्म और शांति का अनुभव

मंदार पर्वत की शांत और सुरम्य वादियां साध्वियों के लिए ध्यान और एकाग्रता के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं। उनकी यह यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास के लिए थी, बल्कि यह जैन धर्म के शाश्वत मूल्यों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का भी एक माध्यम बनी। इस यात्रा ने स्थानीय समुदाय को भी प्रेरित किया और धार्मिक सद्भाव का संदेश दिया।

जैन साध्वियों का यह दल अपनी पंच तीर्थ यात्रा के अगले पड़ाव की ओर बढ़ने से पहले, मंदार पर्वत पर प्राप्त आध्यात्मिक अनुभवों को अपने साथ लेकर गया। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि कैसे प्राचीन धार्मिक स्थल आज भी लोगों को आत्मिक शांति और जीवन के उच्चतर उद्देश्य की ओर आकर्षित करते हैं।

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