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मार्च, 12, 2026
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उत्तर प्रदेश में ‘छिपी हुई NRC’ के खिलाफ अखिलेश यादव का हल्ला बोल: 3 करोड़ से अधिक वोटों पर मंडराया संकट!

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Akhilesh Yadav: चुनावी संग्राम में वोटर लिस्ट हमेशा से एक संवेदनशील मोहरा रही है। अब इसी पर सियासत का पारा चढ़ रहा है, जब एक बड़े नेता ने इसे ‘छिपी हुई एनआरसी’ करार दिया है।

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उत्तर प्रदेश में ‘छिपी हुई NRC’ के खिलाफ अखिलेश यादव का हल्ला बोल: 3 करोड़ से अधिक वोटों पर मंडराया संकट!

अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग को घेरा, हैदराबाद में की अहम बैठकें

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस कवायद को “एनआरसी का छिपा हुआ रूप” बताते हुए भाजपा विरोधी मतदाताओं को सूची से हटाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा करार दिया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर गरमागरम बहस छिड़ गई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा है।

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अखिलेश यादव, जो ‘विजन इंडिया – एआई शिखर सम्मेलन’ में भाग लेने के लिए हैदराबाद पहुंचे थे, ने इस दौरान तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के टी रामा राव सहित अन्य बीआरएस नेताओं से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों को राजनीतिक पर्यवेक्षक आगामी लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं। पत्रकारों से बात करते हुए, सपा प्रमुख ने निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आयोग को बड़े पैमाने पर नाम हटाने की अनुमति देने के बजाय मतदाता भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक मतों के कटने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “यह एसआईआर नहीं है। यह एसआईआर के वेश में एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक पंजी) है।” उन्होंने आगे कहा कि “वे सीधे एनआरसी लागू नहीं कर सके। अब वे इसी तरीके से एनआरसी लेकर आए हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एनआरसी कभी लागू होता है, तो कौन से दस्तावेज मांगे जाएंगे, और उत्तर दिया कि “वही कागजात पेश करने होंगे।” यह आरोप आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सीधे तौर पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं और भविष्य में मतदाता सूची से संबंधित विवादों की आशंका को बल देते हैं।

वोटर लिस्ट पुनरीक्षण: क्या है पूरा मामला?

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों में नए नामों को जोड़ा जाता है, मौजूदा नामों में सुधार किया जाता है और डुप्लीकेट या मृत मतदाताओं के नामों को हटाया जाता है। हालांकि, अखिलेश यादव का आरोप है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह कवायद उन मतदाताओं को निशाना बना रही है जो भारतीय जनता पार्टी के विरोधी माने जाते हैं। इस तरह के आरोप भारतीय लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ सकते हैं। आने वाले समय में निर्वाचन आयोग और संबंधित राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर और टकराव देखने को मिल सकता है।

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