
Darbhanga News: दरभंगा देशज टाइम्स कोर्ट रिपोर्टर। कभी-कभी न्याय की तलवार इतनी तीक्ष्ण होती है कि अपराधियों के लिए जमानत की राह कांटेदार हो जाती है। जब कानून का शिकंजा कसता है, तो अपराध के दलदल में धंसे लोगों को केवल सलाखों के पीछे ही ठिकाना मिलता है।
दरभंगा न्यूज़: दरभंगा सिविल कोर्ट ने हत्या और जानलेवा हमले के आरोपियों की जमानत याचिका की खारिज, कोर्ट का सख्त रुख
दरभंगा न्यूज़: हत्या के गंभीर आरोप में जमानत नामंजूर
सिविल कोर्ट दरभंगा से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम उपेंद्र कुमार की अदालत ने बहादुरपुर थानाकांड संख्या 509/24 के एक हत्या के आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद न्यायिक गलियारों में यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि जघन्य अपराधों के मामले में अदालतें सख्ती बरत रही हैं।
मामला समस्तीपुर जिले के सिंघिया थानाक्षेत्र के फुलहारा गांव निवासी विकास कुमार झा से जुड़ा है, जिस पर देवेन्द्र यादव उर्फ नक्कू की हत्या का आरोप है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने अदालत को बताया कि आरोपी विकास कुमार झा 5 जुलाई 2025 से न्यायिक हिरासत में है। उस पर आरोप है कि उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर स्थानीय वाजितपुर छिपलिया में पेशे से भूमि कारोबारी देवेन्द्र यादव उर्फ नक्कू की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। इस मामले की संवेदनशीलता और आरोपी के विरुद्ध पुख्ता सबूतों को देखते हुए अदालत ने उसकी नियमित जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह फैसला दर्शाता है कि अदालतें अपराध पर लगाम लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अभियोजन पक्ष ने मजबूती से दलील दी कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपियों को जमानत देना समाज में गलत संदेश देगा और न्याय की अवधारणा को कमजोर करेगा। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए विकास कुमार झा को जमानत देने से इनकार कर दिया। अब उसके पास जमानत के लिए पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प शेष है।
अन्य गंभीर मामले में भी नहीं मिली राहत
इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण फैसला आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह की अदालत ने प्राणलेवा हमला (जानलेवा हमला) के एक अन्य आरोपी सुरेंद्र यादव की जमानत याचिका भी खारिज कर दी। सुरेंद्र यादव भालपट्टी थानाक्षेत्र के नैनाघाट का निवासी है। उस पर गंभीर धाराओं के तहत प्राणलेवा हमला करने का आरोप है। अदालत ने इस मामले में भी तथ्यों और सबूतों का गहनता से परीक्षण करने के बाद आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। यह न्यायिक प्रक्रिया दर्शाती है कि कानून सबके लिए समान है और कोई भी दोषी सजा से बच नहीं सकता।
पीपी अमरेंद्र नारायण झा ने दोनों फैसलों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जघन्य अपराधों के आरोपियों के लिए जेल ही सही जगह है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे अपराधियों को बाहर आने का मौका मिलने से समाज में अपराध का ग्राफ बढ़ सकता है और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में बाधा आ सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अदालत का यह रुख दर्शाता है कि न्यायपालिका समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह से सक्रिय है। इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया में कानून की नजर में सभी बराबर हैं, और अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, न्यायपालिका उसे गंभीरता से लेती है।








