
Punjab Local Body Elections: लोकतंत्र के रण में जीत हार का फैसला बुधवार को मतपेटियों से बाहर आया। पंजाब में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए मतगणना कड़ी सुरक्षा के बीच जारी रही। राज्य भर में बनाए गए 154 केंद्रों पर सुबह 8 बजे मतपत्रों की गिनती शुरू हुई।
पंजाब लोकल बॉडी इलेक्शंस: सियासी अखाड़े में कौन किस पर भारी? जानें पूरा हाल
पंजाब लोकल बॉडी इलेक्शंस: मतगणना केंद्रों पर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप
बीते 14 दिसंबर को 22 जिला परिषदों के 347 जोन और 153 पंचायत समितियों के 2,838 जोन से सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान हुआ था। दिन भर चले इस मतदान में कुल 48% वोटिंग दर्ज की गई थी, जिसमें 9,000 से अधिक उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे। मतगणना प्रक्रिया के दौरान पटियाला में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उन्हें पटियाला-नाभा रोड पर स्थित मतगणना केंद्र में प्रवेश करने से रोका गया। SAD नेता जसपाल सिंह ने दावा किया कि पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के बेटे राहुल सैनी मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद थे, जबकि विपक्षी प्रतिनिधियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विपक्षी दलों के आरोप और चुनाव आयोग से गुहार
विपक्षी नेताओं ने इस पूरे मामले पर चुनाव अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की ताकि एक पारदर्शी और निष्पक्ष मतगणना प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह का हस्तक्षेप जारी रहता है, तो लोकतंत्र में जनता का विश्वास कमजोर होगा। इसी तरह की एक और घटना शाम्भू ब्लॉक के लिए मतगणना के दौरान सामने आई। घानाउर स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज में पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर ने आरोप लगाया कि मौजूदा विधायक गुरलाल सिंह घानाउर बिना अनुमति के मतगणना केंद्र में घुस गए थे। जलालपुर ने यह भी दावा किया कि उनके पास वैध पास होने के बावजूद उन्हें और उनके मतगणना एजेंटों को बाहर ही रोक दिया गया, जबकि विधायक को आसानी से अंदर जाने दिया गया। उन्होंने केंद्र पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर भी निष्क्रियता का आरोप लगाया, कहा कि बार-बार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इन चुनाव परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आम आदमी पार्टी (AAP), कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपने पार्टी चिन्हों पर जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव लड़े थे। इन चुनावों के जरिए पंजाब की ग्रामीण राजनीति की तस्वीर साफ होनी थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



