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मार्च, 6, 2026
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अमेरिकी शुल्क से दबाव में Indian Rupee, क्या है वापसी की उम्मीद?

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Indian Rupee: भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय वैश्विक व्यापारिक उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के भंवर में फंसी हुई है, जहां रुपये की चाल पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हाल ही में अमेरिकी आयात शुल्क के कारण भारतीय रुपये पर जबरदस्त दबाव देखा गया है, लेकिन क्या यह गिरावट स्थायी है या भारतीय अर्थव्यवस्था अपने मजबूत आधार पर वापसी करेगी? भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के आर्थिक शोध विभाग की एक ताजा रिपोर्ट इस चुनौती का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जो रुपये के वर्तमान और भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है।

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Indian Rupee पर अमेरिकी शुल्क का प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाए जाने के बाद से भारतीय मुद्रा पर गहरा दबाव बना हुआ है। 2 अप्रैल 2025 के बाद, जब अमेरिका ने व्यापक स्तर पर शुल्क बढ़ाने की घोषणा की, तब से रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 5.7 प्रतिशत कमजोर हुआ है। यह गिरावट दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक मानी जा रही है। यह आंकड़े न केवल व्यापारिक संबंधों में तनाव को दर्शाते हैं, बल्कि वैश्विक संरक्षणवाद के बढ़ते रुझान की भी पुष्टि करते हैं, जिससे विदेशी निवेश के प्रवाह में कमी आई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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हालांकि, एसबीआई रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि रुपये में गिरावट की दर भले ही अधिक रही हो, लेकिन इसमें अत्यधिक अस्थिरता नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के अंतर्निहित आधार अभी भी मजबूत बने हुए हैं। समय-समय पर अमेरिका-भारत व्यापार समझौतों को लेकर बनी उम्मीदों ने रुपये को बीच-बीच में कुछ मजबूती भी दी है, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं विदेशी निवेश के प्रवाह को लगातार सीमित कर रही हैं।

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यह भी पढ़ें:  स्टॉक मार्केट में जबरदस्त उछाल: वैश्विक झटकों के बावजूद बाजार क्यों चढ़ा?

पहले के वर्षों की तुलना में, अब पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया है। जहां वर्ष 2007 से 2014 के बीच औसत शुद्ध पोर्टफोलियो प्रवाह 162.8 अरब डॉलर था, वहीं 2015 से 2025 तक यह घटकर औसतन 87.7 अरब डॉलर रह गया है। एसबीआई के विश्लेषण के अनुसार, 2014 से पहले विदेशी निवेश प्रवाह रुपये में उतार-चढ़ाव का एक प्रमुख कारण था, लेकिन अब व्यापार समझौतों में देरी, वैश्विक अनिश्चितताएं और भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं।

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अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित शक्ति

इसके बावजूद, रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था की韧्यता में गहरा विश्वास व्यक्त करती है। इसने लंबे समय तक चली अनिश्चितता, संरक्षणवाद की लहर और श्रम आपूर्ति में आए झटकों के बावजूद उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया है। वर्तमान कमजोरी के बावजूद, एसबीआई का आकलन है कि अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय रुपये में मजबूत वापसी देखने को मिल सकती है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी पर्याप्त स्तर पर है, और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर किए जा रहे हस्तक्षेप से यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले समय में रुपये की स्थिति फिर से सुदृढ़ होगी। यह भरोसा दर्शाता है कि भारत की आर्थिक नीतियां और बुनियादी संरचनाएं बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम हैं, और एक स्थिर भविष्य की ओर अग्रसर हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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