
BJP Leader: कहानी में ट्विस्ट तो फिल्मों में बहुत देखे होंगे, लेकिन दरभंगा की सियासत और सामाजिक गलियारों में आया ये भूचाल किसी सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं था। जिस अपहरण की कहानी ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी, उसका अंत इतना नाटकीय होगा, किसी ने सोचा न था।
दरभंगा देशज टाइम्स। लहेरियासराय थाना क्षेत्र के मौलागंज निवासी और भाजपा नेता अनिल शर्मा की 23 तारीख से हुई गुमशुदगी ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए थे। परिवार वालों ने सीधे-सीधे अपहरण की आशंका जताते हुए लहेरियासराय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तुरंत हरकत में आई। अनिल शर्मा के मोबाइल फोन को लगातार ट्रेस करने की कोशिशें शुरू हुईं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। टेक्निकल सेल की मदद से उनकी आखिरी लोकेशन का पता लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन लगातार बंद आ रहा था। यह एक ऐसी पहेली बन गई थी, जिसे सुलझाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा था। पुलिस की कई टीमें इस मामले की जांच में जुटी थीं और हर एंगल से पड़ताल कर रही थीं।
पुलिस की तफ्तीश और BJP Leader की लोकेशन का रहस्य
पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए उनके करीबियों और जान-पहचान वालों से भी पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। फोन बंद होने से जांच एक तरह से ठप पड़ गई थी। इस बीच, तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म था। हर कोई यही जानना चाहता था कि आखिर भाजपा नेता कहां और किस हाल में हैं। उनका यूं अचानक गायब हो जाना एक बड़े पारिवारिक विवाद का नतीजा था, इस बात का अंदेशा किसी को नहीं था। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पारिवारिक कलह ने लिखी ‘अपहरण’ की स्क्रिप्ट
लेकिन आज इस पूरे सस्पेंस पर से तब पर्दा उठ गया, जब अनिल शर्मा खुद चलकर लहेरियासराय थाने पहुंच गए। उन्हें सही-सलामत देखकर पुलिस ने राहत की सांस ली। पूछताछ में उन्होंने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था। उन्होंने साफ बताया कि उनका किसी ने अपहरण नहीं किया था, बल्कि घर में हुए विवाद के बाद वे खुद ही घर छोड़कर चले गए थे।
सदर एसडीपीओ ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि अनिल शर्मा ने पारिवारिक कारणों से घर छोड़ने की बात स्वीकार की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनके बयान के बाद पुलिस ने अपहरण की थ्योरी को खारिज कर दिया है और मामले की फाइल बंद कर दी है। इस खुलासे ने जहां परिवार और पुलिस को राहत दी है, वहीं यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।







