
Pausha Putrada Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, और पौष पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसी पावन तिथि है जो संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए करें ये दान
पुत्रदा एकादशी 2025: दान का विशेष महत्व
Pausha Putrada Ekadashi 2025: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, और पौष पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐसी पावन तिथि है जो संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह वर्ष 2025 की अंतिम एकादशी होगी, जो 30 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर दान-पुण्य करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया दान साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है और उसे भगवान नारायण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में कहा गया है कि एकादशी का व्रत और दान-पुण्य न केवल सांसारिक सुख प्रदान करता है, बल्कि मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
दान का महत्व और दान वस्तुएँ
इस शुभ दिन पर इन वस्तुओं का दान कर आप भगवान विष्णु को प्रसन्न कर सकते हैं और उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं:
- **अन्न दान:** चावल, गेहूं, दाल आदि का दान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और अन्नपूर्णा देवी प्रसन्न होती हैं।
- **वस्त्र दान:** गरीबों और जरूरतमंदों को नए या स्वच्छ वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे शनि देव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
- **तिल का दान:** पौष मास में तिल का विशेष महत्व है। इस दिन काले तिल का दान करने से पितृ दोष शांत होते हैं और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
- **घी का दान:** शुद्ध देसी घी का दान करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- **फल दान:** मौसमी फलों का दान करने से घर में खुशहाली आती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
- **जल दान:** किसी प्यासे को जल पिलाना या जल के स्रोत की व्यवस्था करना सबसे बड़ा दान माना जाता है। इससे जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: शुभ मुहूर्त
| तिथि | जानकारी |
|---|---|
| एकादशी तिथि | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) |
| एकादशी प्रारंभ | 29 दिसंबर 2025, रात्रि 09:47 बजे से |
| एकादशी समाप्त | 30 दिसंबर 2025, रात्रि 11:30 बजे तक |
| पारण का समय | 31 दिसंबर 2025, प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 09:17 बजे तक |
पौष पुत्रदा एकादशी का पौराणिक महत्व
पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है। इस दिन भगवान नारायण की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने और दान-पुण्य करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को निरोगी एवं दीर्घायु संतान का वरदान देते हैं। यह व्रत पुत्र की कामना से किया जाता है, किंतु पुत्री की कामना रखने वाले भी इसे पूरी श्रद्धा से कर सकते हैं, क्योंकि भगवान की दृष्टि में पुत्र और पुत्री समान हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मंत्र जाप
इस दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी होता है:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।
शांतिरस्तु पुष्टिरस्तु तुष्टिरस्तु।
निष्कर्ष एवं उपाय
पौष पुत्रदा एकादशी का यह पावन दिन हमें धर्म, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु की आराधना करने और सामर्थ्य अनुसार दान करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं। इससे न केवल संतान सुख प्राप्त होता है, बल्कि धन-धान्य में भी वृद्धि होती है और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह व्रत मोक्ष प्राप्ति का भी एक महत्वपूर्ण साधन है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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