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फ़रवरी, 24, 2026
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Bihar Politics: बक्सर में मायावती की पार्टी को बड़ा झटका, जिला इकाई में सामूहिक इस्तीफों से हड़कंप

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Bihar Politics: बक्सर की सियासी जमीन पर एक बार फिर भूचाल आ गया है, जहां हाथी की सवारी करने वाले कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ दिया है। यह सिर्फ चंद इस्तीफे नहीं, बल्कि एक गहरी संगठनात्मक दरार की गवाही है, जो बहुजन समाज पार्टी के बिहार इकाई में स्पष्ट दिख रही है।

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Bihar Politics: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की बिहार इकाई में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली है। बक्सर जिले में पार्टी के मौजूदा और पूर्व पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इन नेताओं ने पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटनाक्रम को बसपा के लिए बिहार में एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक, जिला इकाई के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे नेताओं ने एक साथ पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। इनमें जिला अध्यक्ष से लेकर प्रखंड स्तर के कई पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। इन सभी का आरोप है कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की जा रही है और कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाया जा रहा है। उनकी शिकायतों को अनसुना किया गया, जिसके बाद उनके पास सामूहिक इस्तीफा देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा।

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Bihar Politics: क्यों मची बक्सर बसपा में भगदड़?

इस्तीफा देने वाले नेताओं का कहना है कि लंबे समय से वे पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने संगठन के भीतर मनमानी, अनदेखी और कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। यह आरोप सीधे तौर पर पार्टी की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाई पर उंगली उठा रहे हैं, जिससे यह साफ होता है कि यह सिर्फ स्थानीय स्तर का असंतोष नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

बक्सर जैसे महत्वपूर्ण जिले में इतने बड़े पैमाने पर सामूहिक इस्तीफे बसपा के लिए चिंता का विषय हैं। बिहार में पार्टी पहले से ही अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही है, और ऐसे में प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना आगामी चुनावों में उसकी संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। यह घटना संगठन में चल रही संगठनात्मक खींचतान को भी उजागर करती है।

नेतृत्व पर गंभीर आरोप: क्या हैं नेताओं के दर्द?

इस्तीफा देने वाले नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व का रवैया अलोकतांत्रिक है और उन्हें जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने पार्टी के सिद्धांतों से विचलन और व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। यह संगठनात्मक खींचतान पार्टी के भीतर एक बड़े विद्रोह का संकेत है, जिससे बसपा की बिहार इकाई में भविष्य की राह और कठिन हो सकती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पार्टी छोड़ने वाले इन नेताओं ने अभी अपने अगले कदम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नेता किसी और दल का दामन थाम सकते हैं, जिससे बक्सर की स्थानीय राजनीति में समीकरण बदल सकते हैं। इस घटना ने बसपा के बिहार में अस्तित्व और प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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बसपा के भविष्य पर सवालिया निशान

बक्सर में हुए इस घटनाक्रम ने बहुजन समाज पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को बिहार इकाई में गहरा चिंतन करने पर मजबूर कर दिया है। देखना होगा कि पार्टी इन इस्तीफों से हुए नुकसान की भरपाई कैसे करती है और अपने कार्यकर्ताओं में फिर से विश्वास कैसे जगा पाती है। यह घटना दर्शाती है कि सिर्फ नाम बड़े होने से संगठन नहीं चलता, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का सम्मान और उनकी भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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