
Amartya Sen Voter List: जीवन में कुछ गड़बड़ियाँ इतनी मामूली होती हैं कि उन पर बेवजह का बखेड़ा खड़ा हो जाता है। ऐसी ही एक गुत्थी उलझती दिख रही थी, जब नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के मतदाता सूची में नाम को लेकर सवाल उठने लगे थे। देश के जाने-माने अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को लेकर चुनाव आयोग ने एक बड़ी स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग ने कहा है कि सेन को मतदाता सूची में नाम की वर्तनी में कथित विसंगतियों के लिए किसी भी सुनवाई में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। इस घोषणा से उस विवाद पर विराम लग गया है, जो कुछ दिनों से सुर्ख़ियों में था।
Amartya Sen Voter List: क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयोग ने अमर्त्य सेन को उनके मतदाता पहचान पत्र में नाम की वर्तनी में हुई त्रुटियों के संबंध में सुनवाई के लिए बुलाया था। इस खबर के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज़ हो गई थी। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने तो दिन में यह दावा भी कर दिया था कि आयोग ने सेन को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सुनवाई का नोटिस भेजा है। हालांकि, सेन के परिवार के एक सदस्य ने इन दावों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि उन्हें आयोग से ऐसा कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण पर मंगलवार को विस्तार से जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मतदाता पहचान पत्र सुधार और छोटी-मोटी त्रुटियों को ठीक करने का अधिकार बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के पास होता है। ऐसे में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के मामले में भी वर्तनी की गलती का सुधार स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक रूप से ही निपटाया जाएगा। इसका अर्थ है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। आयोग ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नामों की वर्तनी को लेकर जो भ्रम था, वह पूरी तरह से तकनीकी है और इसका मतदाता की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता है।
आयोग ने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों को प्रशासनिक स्तर पर ही सुलझाया जाए ताकि अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। आयोग ने यह भी आगाह किया कि मतदाताओं के नामों में मामूली त्रुटियाँ सुनवाई प्रक्रिया या मतदाता के अधिकारों को प्रभावित नहीं करती हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अधिकारियों को ऐसी तकनीकी बातों पर सार्वजनिक विवाद पैदा करने से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुगमता बनी रहे, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



