
Mauni Amavasya 2026: माघ मास की पवित्र मौनी अमावस्या तिथि पर पितरों का स्मरण और तर्पण विशेष फलदायी माना जाता है। यह दिन आत्मशुद्धि, मौन व्रत और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या का महात्म्य और शुद्ध तिथि
माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या अथवा माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस पावन दिवस पर गंगा अथवा अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और सामर्थ्य अनुसार दान करने से समस्त पापों का क्षय होता है। यह स्नान दान का पर्व आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का अनुपम अवसर प्रदान करता है। पितरों की आत्मा की शांति हेतु इस दिन तर्पण एवं श्राद्ध कर्म भी संपन्न किए जाते हैं। अनेक श्रद्धालु इस दिन मौन व्रत धारण कर अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण का अभ्यास करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या की तिथि को लेकर भक्तों के मन में कुछ असमंजस की स्थिति व्याप्त है। आइए, इस लेख के माध्यम से हम मौनी अमावस्या 2026 की सही तिथि और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
कब है Mauni Amavasya 2026: जानिए शुद्ध तिथि
वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या शनिवार, 17 जनवरी को मनाई जाएगी। कुछ पंचांगों में इसे लेकर थोड़ी भिन्नता प्रतीत हो सकती है, किंतु ज्योतिषीय गणनाओं और धर्मशास्त्रीय सिद्धांतों के अनुसार 17 जनवरी ही शुद्ध एवं सर्वमान्य तिथि है। अमावस्या तिथि 16 जनवरी की रात्रि से प्रारंभ होकर 17 जनवरी की रात्रि तक व्याप्त रहेगी, जिसमें सूर्योदयकालिक अमावस्या एवं संपूर्ण अमावस्या तिथि 17 जनवरी को ही प्राप्त हो रही है।
मौनी अमावस्या का आध्यात्मिक महत्व
हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन धारण करने से मन को असीम शांति प्राप्त होती है और व्यक्ति आत्मचिंतन में लीन हो पाता है। इस दिन पवित्र सरोवरों अथवा नदियों में डुबकी लगाने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवात्मा को मोक्ष की दिशा में अग्रसर होने का अवसर मिलता है। पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध तथा दान-पुण्य करने से वे प्रसन्न होते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह पवित्र दिवस ग्रह दोषों की शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी अत्यंत उत्तम माना गया है।
मौनी अमावस्या के दिन क्या करें?
इस पावन दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागरण कर किसी पवित्र नदी में स्नान करने का प्रयास करें। यदि किसी कारणवश यह संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान उपरांत सूर्य देव को अर्घ्य प्रदान करें। पितरों के निमित्त तर्पण आदि कर्म संपन्न करें और यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन कराएं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन मौन व्रत का पालन करना विशेष फलदायी होता है, परंतु यदि यह संभव न हो तो कम से कम कटु वचन बोलने से बचें और मन को शांत रखें।
पितृ तर्पण का विधान
मौनी अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठकर, जल में काले तिल, कुश और जौ मिलाकर श्रद्धापूर्वक पितरों को तर्पण किया जाता है। इस विधान से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और गृहस्थ जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।
निष्कर्ष एवं उपाय
मौनी अमावस्या का यह दिवस आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण होता है। इस दिन किए गए छोटे से छोटे पुण्य कर्म का फल भी कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश मौन व्रत धारण न कर पाए तो उसे कम से कम अपने मन को शांत रखकर शुभ कर्मों में लीन रहना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु और देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रकार मौनी अमावस्या का यह पावन पर्व हमें आत्मिक शुद्धि, पितरों के आशीर्वाद और अलौकिक शांति से परिपूर्ण करता है।
उपाय: मौनी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की परिक्रमा कर सायंकाल में दीपक प्रज्वलित करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं और शनि दोषों की शांति होती है।





