
Bhagalpur News: जब व्यवस्था की चमक-दमक के पीछे अंधेरे में डूबी हकीकत दम तोड़ती है, तब अक्सर कोई बड़ा दौरा ही उस पर से पर्दा उठाता है। भागलपुर के सन्हौला प्रखंड में भी कुछ ऐसा ही मंज़र देखने को मिला, जहाँ नीति आयोग की टीम के आगमन ने अचानक सफाई व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त कर दिया।
Bhagalpur News: नीति आयोग के दौरे से चमका सन्हौला, पर सफाई कर्मियों के 6 महीने के बकाए ने खोली पोल!
Bhagalpur News: नीति आयोग का दौरा और प्रशासनिक सक्रियता
भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड में नीति आयोग की टीम के प्रस्तावित दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिन इलाकों में सामान्य दिनों में अक्सर गंदगी पसरी रहती थी, वहाँ अब विशेष तौर पर साफ-सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस अचानक आई तेजी को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि नीति आयोग की टीम के आने की सूचना मिलते ही सफाई व्यवस्था में यह फुर्ती क्यों दिखाई जा रही है, जबकि पहले कभी ऐसी नियमितता नहीं थी।
इस दौरान, सफाई कार्यों का जायजा लेने पर आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सफाई कर्मियों के सुपरवाइजर ने दावा किया कि क्षेत्र में रोजाना सफाई होती है। हालांकि, मौके पर मौजूद स्थानीय निवासियों ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि उनके यहाँ कभी नियमित सफाई नहीं की जाती है। यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से उजागर करती है।
सफाई कर्मियों का दर्द: 6 महीने से वेतन का इंतजार
सबसे गंभीर खुलासा सफाई अभियान में जुटे कर्मियों ने किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पिछले छह महीने से कोई भुगतान नहीं मिला है। वेतन न मिलने के कारण उन्हें और उनके परिवारों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एक सफाई कर्मचारी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि पहले उन्हें 2500 से 3000 रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 5000 रुपये तो कर दिया गया, लेकिन इस बढ़ोतरी का कोई लाभ नहीं है क्योंकि उन्हें भुगतान ही नहीं किया गया।
कर्मियों का कहना है कि जब समय पर मजदूरी नहीं मिलेगी तो वे अपना काम कैसे करेंगे और अपने घर-परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे? छह महीने से वेतन न मिलने से उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है कि आखिर इतनी लंबी अवधि से इन मेहनती कर्मचारियों का भुगतान क्यों रोका गया है और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है? देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
नीति आयोग के दौरे से पहले खुली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल
नीति आयोग की टीम के आगमन से ठीक पहले सामने आई यह स्थिति न केवल सन्हौला प्रखंड की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है बल्कि यह भी दिखाती है कि केवल दिखावे के लिए ही काम किया जाता है। नियमित व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय, महत्वपूर्ण दौरों के समय ही सक्रियता दिखाना कहीं न कहीं सुशासन के दावों पर प्रश्नचिह्न लगाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मामला दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर अभी भी बहुत कुछ सुधारने की आवश्यकता है ताकि आम लोगों और खासकर निचले तबके के कर्मचारियों को उनके हक का भुगतान मिल सके और व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे। इस पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।


