
Darbhanga News: समाज की बगिया का एक और फूल हमेशा के लिए मुरझा गया। दरभंगा ने अपने एक अनमोल रत्न, समाजसेवी जगन्नाथ झा उर्फ मंदो झा को खो दिया है, जिनके निधन से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। शुक्रवार की शाम उन्होंने बहेड़ी प्रखंड स्थित अपने पैतृक आवास पर अंतिम सांस ली।
Darbhanga News: पैतृक आवास पर हुआ आकस्मिक निधन
जानकारी के अनुसार, दरभंगा जिला न्याय अतिथि संघ के संस्थापक सदस्य और इलाके के जाने-माने समाजसेवी जगन्नाथ झा, जो सभी के बीच ‘मंदो जी’ के नाम से लोकप्रिय थे, अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार की संध्या बहेड़ी प्रखंड के सिरुआ गांव में स्थित उनके पैतृक आवास पर उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे बहेड़ी प्रखंड सहित जिले भर में शोक का माहौल व्याप्त हो गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वह अपने पीछे दो पुत्र मनोज कुमार झा और तरुण कुमार झा समेत पोते-पोतियों से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
सिविल कोर्ट में दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
शनिवार को उनके निधन के शोक में सिविल कोर्ट दरभंगा प्रांगण में एक शोकसभा का आयोजन किया गया। न्याय अतिथि संघ के संयोजक गोविंद झा की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में न्यायिक समुदाय के कई गणमान्य लोग शामिल हुए। वहां मौजूद सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान न्याय अतिथि चौधरी सुनील कुमार राय उर्फ लाला भाई, गोविन्द मिश्र, राजेश राय, और सरोज सिंह समेत कई लोगों ने अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। वक्ताओं ने कहा कि मंदो झा का निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
इनके अतिरिक्त, आईटीआई के सेवानिवृत्त कर्मी रामनाथ झा, कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राचार्य विजय कुमार ठाकुर, अवकाश प्राप्त शिक्षक श्याम नाथ झा, लोहा सिंह, जयशंकर प्रसाद चौधरी, बासुकी नाथ झा, इंद्रनाथ झा, और अधिवक्ता अरुण कुमार चौधरी समेत दर्जनों लोगों ने उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
शनिवार को सिरुआ गांव स्थित गाछी में मंदो जी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी। उनका सरल और मिलनसार स्वभाव ही था कि हर कोई उन्हें सम्मान देता था। उनके जाने से समाज में जो खालीपन आया है, उसे भर पाना मुश्किल होगा। उनका जीवन हमेशा दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।


