
Dattatreya Hosabale: जैसे राजनीति की बिसात पर मोहरे अपनी चाल चलते हैं, वैसे ही राष्ट्रनीति के यज्ञ में विचारों की आहुति पड़ती है। दरभंगा की धरती पर कुछ ऐसा ही वैचारिक मंथन हुआ, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने समाज के हर वर्ग को उनके कर्तव्यों का आईना दिखाया और भारत के विश्वगुरु बनने का मार्ग प्रशस्त किया।दरभंगा के डीएमसीएच ऑडिटोरियम में बुधवार को आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष संगोष्ठी में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने अपने प्रेरक सम्बोधन से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजनों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
दरभंगा में Dattatreya Hosabale ने बताया राष्ट्र निर्माण का सूत्र
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति और प्रत्येक वर्ग अपने निर्धारित कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे, तो भारत को विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना से लेकर अब तक की 100 वर्षों की तपस्या, सेवा और राष्ट्र निर्माण की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का एकमात्र ध्येय भारत राष्ट्र को परम वैभव के शिखर पर पहुंचाना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि संघ किसी व्यक्ति या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए काम करता है।
सरकार्यवाह ने आगे कहा कि संघ ने हमेशा समाज को संगठित करने, नागरिकों में राष्ट्रभक्ति का भाव जगाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई है। आज सेवा कार्य, शिक्षा, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे अनगिनत क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
‘पंच परिवर्तन’ से बनेगा आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिष्ठ समाज
अपने संबोधन में होसबोले ने संघ के शताब्दी वर्ष के संकल्पों पर प्रकाश डालते हुए ‘पंच परिवर्तन’ का लक्ष्य समाज के सामने रखा। उन्होंने कहा कि ये केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में लाने योग्य संकल्प हैं, जिनसे एक आत्मनिर्भर और राष्ट्रनिष्ठ समाज का निर्माण होगा।
- सामाजिक समरसता: समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव, चाहे वह जाति, वर्ग या पंथ पर आधारित हो, राष्ट्र की एकता के लिए घातक है। संघ एक समरस समाज की कल्पना करता है।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति का संतुलन बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
- स्वदेशी जीवन शैली: आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वदेशी उत्पादों और जीवन शैली को अपनाना अनिवार्य है।
- नागरिक कर्तव्य बोध: अधिकारों के साथ-साथ नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होना चाहिए।
- कुटुंब प्रबोधन: परिवार भारतीय संस्कृति की सबसे मजबूत इकाई है और संस्कारयुक्त परिवार ही राष्ट्र के चरित्र का निर्माण करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
युवाओं और परिवार व्यवस्था पर दिया विशेष जोर
सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “अनुशासन, चरित्र निर्माण, सेवा भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण के साथ जब युवा पीढ़ी आगे बढ़ेगी, तभी देश का भविष्य उज्ज्वल होगा।” उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में संस्कार, संवाद और समर्पण को प्राथमिकता दें, क्योंकि सुदृढ़ परिवार व्यवस्था ही एक सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा समाधान सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए हिन्दू समाज को एकजुट होने का संदेश दिया।




