
Gupt Navratri 2026: इस वर्ष गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व अत्यंत शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा। यह नौ दिवसीय अनुष्ठान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की गोपनीय आराधना के लिए समर्पित है, जिसमें भक्तगण अपनी गुप्त मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु देवी शक्ति का आह्वान करते हैं।
गुप्त नवरात्रि 2026: मां दुर्गा की आरती से पाएं अमोघ कृपा
गुप्त नवरात्रि 2026 में दुर्गा आरती का महत्व
गुप्त नवरात्रि 2026 का समय माता दुर्गा की उपासना के लिए अत्यंत विशेष होता है। इन पावन नौ दिनों में की गई साधना और आराधना शीघ्र फलदायी होती है। शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा अर्चना में आरती का विशेष स्थान है। आरती के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। जो भक्त पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की उपासना कर आरती करते हैं, उनके सभी दुख-कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सफलता आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह समय विशेष रूप से उन साधकों के लिए अत्यंत फलदायी होता है जो तंत्र-मंत्र की साधना करते हैं, परंतु सामान्य गृहस्थ भी मां की कृपा पाने के लिए श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर सकते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
मां दुर्गा की आरती की विधि
मां दुर्गा की आरती करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है, जिससे पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके:
- सर्वप्रथम ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर एक चौकी पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- घी का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-अगरबत्ती लगाएं, जिससे वातावरण शुद्ध और सुगंधित हो जाए।
- मां को पुष्प, सिंदूर, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- पूजा के उपरांत, परिवार सहित एकाग्रचित्त होकर मां दुर्गा की आरती करें। आरती के माध्यम से हम देवी से सीधा संवाद स्थापित करते हैं, और यह पवित्र गान हमें उनकी असीम कृपा से जोड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- आरती के बाद मां से अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और प्रसाद वितरित करें, स्वयं भी ग्रहण करें।
श्री दुर्गा जी की आरती के बोल
मां दुर्गा की यह पावन आरती सभी दुख-कष्टों को हरने वाली और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली मानी जाती है:
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी…मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दो नैना, चंद्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी…कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजे॥
जय अम्बे गौरी…केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी…कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटि चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥
जय अम्बे गौरी…शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्रविलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी…चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी…ब्रह्माणी रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी…चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥
जय अम्बे गौरी…तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी…भुजा चार अति शोभित, खड्ग खप्पर धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी…कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी…श्री अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
जय अम्बे गौरी…
मां दुर्गा की आरती का यह पवित्र पाठ भक्तों के हृदय में शांति और ऊर्जा का संचार करता है। गुप्त नवरात्रि के इन पावन दिनों में सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती करने से देवी मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर अनवरत कृपा बरसाती हैं। यह एक शक्तिशाली मंत्र की भांति कार्य करता है, जो सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर कर सकारात्मकता लाता है। हमारी यही कामना है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, कि मां दुर्गा आपकी सभी इच्छाएं पूर्ण करें। इस गुप्त नवरात्रि में, मां की आरती को अपने नित्य पूजन का अभिन्न अंग बनाएं और अलौकिक सुख की अनुभूति प्राप्त करें।





