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मार्च, 13, 2026
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Fodder Scam: 28 साल बाद चारा घोटाला 2.O रिटर्न, 11 रिवोकेशन और जब्त होंगी अपराधियों की ‘अवैध संपत्ति’!

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Fodder Scam: कभी-कभी न्याय की चक्की देर से चलती है, पर जब चलती है तो बड़े-बड़ों को पीस देती है। 28 साल बाद अब चारा घोटाला भी उसी राह पर है, जहां अपराधियों की कुंडली में दर्ज अवैध कमाई का हिसाब होने वाला है।

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Fodder Scam: 28 साल बाद फिर तेज हुई कार्रवाई, जब्त होंगी अपराधियों की ‘अवैध संपत्ति’!

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Fodder Scam: अवैध संपत्तियों की वापसी का रास्ता साफ़!

देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक, 28 साल पुराने मामलों में अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की रिकवरी के लिए कार्रवाई ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ ली है। इस बहुचर्चित मामले से जुड़े कुल 11 रिवोकेशन केस की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में शुरू हो चुकी है। ये वही मामले हैं जो पहले पटना स्थित सीबीआई कोर्ट में लंबित थे और लंबे समय से चले आ रहे थे। पटना हाईकोर्ट ने इन मामलों को आगे बढ़ाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट को स्थानांतरित कर दिया था। झारखंड हाईकोर्ट ने इन सभी केसों को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (SPCJ) ए. के. तिवारी की अदालत में सुनवाई के लिए भेजा है। बीते दिसंबर महीने में इन सभी मामलों पर नए सिरे से रिवोकेशन संख्या जारी की गई थी, जिसके बाद अब इन 11 केसों की सुनवाई विधिवत प्रारंभ हो चुकी है।

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इन मामलों की पहली सुनवाई के बाद अदालत ने दूसरे पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब आरोपियों और उनके परिवारों द्वारा अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को वापस लेने की प्रक्रिया को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

चारा घोटाला, जो 1990 के दशक में देश के सामने आया था, उसमें चाईबासा, गोड्डा, हजारीबाग और साहिबगंज कोषागारों से बड़े पैमाने पर चारा की अवैध निकासी और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप था। इस बड़े घोटाले में कई उच्चाधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों के नाम भी सामने आए थे। वर्षों से चल रहे इस मामले में आरोपी या दोषी व्यक्तियों ने अपने अपराध से अर्जित की गई अवैध संपत्ति को अपने नाम या परिजनों के नाम पर दर्ज करा रखा था। इन संपत्तियों में ज़मीन, घर, दुकान, प्लॉट, बैंक में जमा राशि और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि कई संपत्तियां अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थीं, लेकिन आरोपियों ने उन्हें अपने नाम या कानूनी वारिसों के नाम पर हस्तांतरित करा लिया था। अब अदालत के आदेश के बाद इन अवैध संपत्तियों को रिकवर करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

विशेष रूप से चारा घोटाले के मामलों में रिवोकेशन (रद्दीकरण) प्रक्रिया का अर्थ है कि कोर्ट द्वारा पहले से दिए गए आदेशों, रिहाई, या किसी प्रकार के लाभ को वापस लेना। यह प्रक्रिया इसलिए आवश्यक होती है क्योंकि पहले कई मामलों में आरोपियों को कुछ राहत मिल चुकी थी या संपत्तियों को उनके नाम पर रखने की अनुमति मिल गई थी। अब अदालत ने पुन: समीक्षा कर यह तय किया है कि इन संपत्तियों को सरकार के कब्जे में लिया जाए। जांच एजेंसियां अपने सबूतों और दस्तावेजों के आधार पर यह साबित करेंगी कि ये संपत्तियां आरोपियों द्वारा किए गए अपराध से अर्जित की गई थीं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद अदालत इन संपत्तियों को रिवोकेशन के आदेश के तहत सरकार को हस्तांतरित करने का आदेश दे सकती है। इस कदम को भ्रष्टाचार और सरकारी धन की हेराफेरी के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय तक मामलों की देरी के कारण आरोपियों ने अपनी संपत्तियों को सुरक्षित कर लिया था। अब अदालत द्वारा रिवोकेशन केस की सुनवाई शुरू होने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सरकारी धन को वापस लाने की प्रक्रिया को गंभीरता से लिया जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

झारखंड हाईकोर्ट की नई पहल: भ्रष्टाचार पर चोट

चारा घोटाले से जुड़े मामले का इतिहास काफी लंबा है। 1990 के दशक में चारा कोषागार से अवैध निकासी और धन का गबन करके उसे निजी संपत्ति में बदलने का आरोप सामने आया था। इस मामले में कई अधिकारियों और राजनीतिक लोगों के नाम भी जुड़े थे। हालांकि समय के साथ मामलों में देरी और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण आरोपियों को राहत मिलती रही। अब जब झारखंड हाईकोर्ट ने इन मामलों को पुनर्जीवित किया है, तो यह साफ संकेत है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुकदमों में देरी की संस्कृति को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आगे की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि आरोपियों द्वारा अर्जित संपत्तियां किस हद तक अपराध से जुड़ी हैं और उन्हें किस प्रकार सरकार के कब्जे में लिया जा सकता है। यदि अदालत इन संपत्तियों को रिकवर करने का आदेश देती है तो यह न केवल सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ समाज में भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

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Fodder Scam से जुड़ी 28 साल पुरानी संपत्ति रिकवरी की प्रक्रिया अब नए सिरे से शुरू हो चुकी है। 11 रिवोकेशन केस की सुनवाई से यह उम्मीद बढ़ गई है कि अपराध से अर्जित संपत्तियों को वापस सरकार के कब्जे में लाया जा सकेगा। अदालत के फैसले के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना है।

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