
Doctor’s Death: स्वास्थ्य की मशाल थामने वाले हाथ ही जब बुझने लगें, तो समझिए व्यवस्था में गहरी दरार है। समस्तीपुर के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CMO) डॉ. संजय कुमार चौधरी की कार्यस्थल पर हुई असामयिक मृत्यु ने एक बार फिर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। इस घटना से न केवल आम लोगों में, बल्कि पूरे चिकित्सा जगत में शोक और आक्रोश की लहर है।
दरभंगा मेडिकल कॉलेज एल्युमिनी एसोसिएशन के सचिव डॉक्टर सुशील कुमार ने अपने सहपाठी डॉ. संजय कुमार चौधरी की कर्तव्य निर्वहन के दौरान हुई मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को व्यवस्था की विफलता करार दिया। उनके साथ ही दरभंगा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर उमेश चंद्र झा, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉक्टर विनयानंद झा, डॉ. साजिद हुसैन, डॉ. अनिल कुमार मेहता, डॉ. महेश चंद्रा, डॉ. सुकांत कुमार दत्ता और सीनियर डॉक्टर ओम प्रकाश ने भी प्राचार्य कक्ष में आयोजित एक बैठक के बाद दिवंगत आत्मा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
क्या काम का दबाव बना Doctor’s Death की वजह?
डॉ. सुशील कुमार ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य के रखवालों का अपना ही स्वास्थ्य दांव पर लगा है। उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत रहते हुए जान गंवाने वाले सिविल सर्जनों की यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इसकी एक लंबी सूची है। डॉक्टरों पर अवास्तविक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अत्यधिक दबाव बनाया जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई प्रशासनिक पदाधिकारियों और जिलाधिकारियों का अमानवीय व्यवहार चिकित्सकों पर दबाव को और बढ़ा देता है, जिससे वे लगातार तनाव में रहते हैं।
इन कठिन परिस्थितियों में डॉक्टरों को अपनी सेहत का ध्यान रखने तक का समय नहीं मिल पाता है। अव्यवहारिक दिनचर्या और क्षमता से अधिक काम के बोझ तले वे अपने इलाज के बारे में सोच भी नहीं पाते। यह स्थिति भविष्य में और भी गंभीर संकट का संकेत दे रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है।
सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस दुखद घटना के बाद, साथी चिकित्सकों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। डॉ. सुशील कुमार ने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि इन घटनाओं के मूल कारणों की पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए। उन्होंने कहा, “सरकार को यह समझना होगा कि आखिर क्यों हमारे डॉक्टर ड्यूटी पर दम तोड़ रहे हैं। इसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने यह भी मांग की कि समिति द्वारा दिए गए सुझावों पर तत्काल अमल किया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य चिकित्सक को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।







