
Earth Day: धरती को बचाने की अलख जगाने के लिए दरभंगा में एक अनूठा कार्यक्रम हुआ। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग ने वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी के साथ मिलकर पृथ्वी दिवस पर गंभीर मंथन किया, जिसमें भविष्य की दिशा तय करने वाले ‘नेचुरल डेमोक्रेसी’ मॉडल पर खास जोर दिया गया।ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर भूगोल विभाग में पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। भूगोल विभाग और वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी (WND) के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस आयोजन में प्रकृति के प्रति हमारे उत्तरदायित्व को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ‘पृथ्वी ध्वज’ के ध्वजारोहण से हुआ, जो संतुलन और संरक्षण का सशक्त संदेश देता है। पूर्व कुलपति प्रो. सुरेन्द्र मोहन झा ने इस मौके पर कहा कि प्रकृति के साथ हमारा असंतुलन गंभीर चिंता का विषय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। उन्होंने ‘नेचुरल डेमोक्रेसी’ को केवल एक विचार नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य वैचारिक दिशा बताया, जिसके जरिए प्रकृति को शासन और नीति-निर्माण के केंद्र में लाया जा सकता है।
पृथ्वी दिवस पर गंभीर विमर्श और महत्वपूर्ण लोकार्पण
इस गरिमामय आयोजन में पूर्व कुलपति प्रो. सुरेन्द्र मोहन झा, विभागाध्यक्ष डॉ. अनुरंजन, नालंदा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रो. एम नेहाल, सामाजिक विज्ञान के संकायाध्यक्ष प्रो. शाहिद हसन, पीआरओ डॉ. आर.एन. चौरसिया और वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी के संस्थापक डॉ. जावेद अब्दुल्लाह समेत कई प्रतिष्ठित शिक्षाविद, शोधकर्ता और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. अनुरंजन ने प्रो. झा और प्रो. नेहाल को पाग-शॉल भेंट कर सम्मानित किया। इसी दौरान WND की शैक्षणिक पहलों के तहत WND यूनिवर्सिटी (वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी यूनिवर्सिटी) और ‘यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीडम’ परियोजना की आधिकारिक वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया। डॉ. जावेद अब्दुल्लाह ने विचार की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी परिवर्तन पहले विचार में जन्म लेता है, फिर वह व्यवहार में आता है। प्रो. एम नेहाल ने युवाओं को परिवर्तन का वास्तविक वाहक बताते हुए ‘नेचुरल डेमोक्रेसी’ को भविष्य की अनिवार्य दिशा बताया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
पर्यावरण संरक्षण और युवा भागीदारी
डॉ. अनुरंजन ने पर्यावरणीय नैतिकता को केवल अकादमिक अध्ययन का विषय न मानकर, इसे जीवनशैली और नीति-निर्माण का मूल आधार बनाने पर बल दिया। प्रो. एम नेहाल ने आगाह किया कि पृथ्वी ही एकमात्र जीवित ग्रह है, जिसे आज सबसे बड़ा खतरा उसके ही निवासियों से है। उन्होंने कहा कि ‘नेचुरल डेमोक्रेसी’ ही इसे संतुलित भविष्य की दिशा दे सकती है। इस दौरान वृक्षारोपण कर सतत विकास का संदेश दिया गया। साथ ही छात्र-छात्राओं द्वारा आयोजित चित्रकला, भाषण, निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया, जिससे पर्यावरण चेतना और रचनात्मकता को नई ऊर्जा मिली। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहायक प्राध्यापक डॉ. रश्मि शिखा, डॉ. सुनील कुमार सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अमरजी कुमार, रिज़वान, एहब अब्दुल्लाह और निक्कू कुमार की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम का संचालन ए.एन. झा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनुराज शर्मा ने प्रस्तुत किया।








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