
Budget 2026: केंद्रीय बजट एक ऐसा दर्पण है जो सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है, लेकिन इस बार आरजेडी को इसमें गरीबों का अक्स धुंधला ही नजर आ रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आगामी वित्तीय वर्ष के बजट Budget 2026 को ‘गरीब विरोधी’ करार देते हुए तीखा हमला बोला है, जिससे राजनीतिक गलियारों में गरमाहट बढ़ गई है।
Budget 2026: RJD का केंद्र पर तीखा वार, ‘गरीब विरोधी’ बजट से कैसे सजेगा ‘विकसित भारत’ का सपना?
Budget 2026: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित बजट को लेकर अपनी भड़ास निकाली है। पार्टी ने इसे ‘गरीब विरोधी’ बताते हुए दावा किया कि यह आम आदमी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने इस बजट की कड़ी आलोचना करते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत क्षेत्रों में सरकार की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कोठारी आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर जीडीपी का पर्याप्त हिस्सा खर्च नहीं किया जा रहा है, जिससे देश के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य: Budget 2026 पर RJD के तीखे सवाल
शक्ति यादव ने जोर देकर कहा कि अगर देश के स्कूल और अस्पताल बदहाल स्थिति में रहेंगे, तो ‘विकसित भारत’ का नारा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें ही हाशिये पर हैं, तो किस प्रकार के विकास की परिकल्पना की जा सकती है? उनका कहना था कि इस नवीनतम बजट में इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवंटित राशि निराशाजनक है और यह जनता के साथ धोखा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कोठारी आयोग की सिफारिशें और वर्तमान स्थिति
आरजेडी प्रवक्ता ने विशेष रूप से कोठारी आयोग की रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें शिक्षा पर जीडीपी का कम से कम 6% खर्च करने की सिफारिश की गई थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयास किया कि वर्तमान सरकार इन सिफारिशों को पूरा करने में विफल रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी स्थिति कोई बेहतर नहीं है, जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ग्रामीण और गरीब तबके को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और चिकित्सा से वंचित रखा जा रहा है, तो समावेशी विकास की बात बेमानी हो जाती है। सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और आगामी बजटों में इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





