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फ़रवरी, 12, 2026
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Bihar Land Survey: लाखों एकड़ बिना सर्वे वाली जमीन पर सरकार का बड़ा फैसला, दो साल में पूरा होगा विशेष अभियान

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Bihar Land Survey: सदियों से चली आ रही जमीनों की उलझी गुत्थियों को सुलझाने के लिए, बिहार सरकार ने अब एक नई राह पकड़ी है, एक ऐसी राह जो लाखों भूमिहीन और जमाबंदी विहीन किसानों को राहत की साँस देगी।

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बिहार लैंड सर्वे: लाखों एकड़ बिना सर्वे वाली जमीन पर सरकार का बड़ा फैसला, दो साल में पूरा होगा विशेष अभियान

बिहार लैंड सर्वे: क्या है सरकार का नया संकल्प?

बिहार में भूमि संबंधी एक बड़ी चुनौती से जूझते हुए, सरकार ने अब एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। विधानसभा में राजस्व मंत्री ने बताया कि राज्य में आज भी लगभग 20 प्रतिशत भूमि ऐसी है जिसका विशेष सर्वेक्षण अभियान के तहत सर्वे नहीं हो पाया है। यह आंकड़ा लाखों एकड़ में फैला हुआ है, जहां न तो जमीन का लगान तय है और न ही उसकी जमाबंदी दर्ज है। इस स्थिति से भू-स्वामियों और सरकार दोनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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यह एक ऐसी जटिल समस्या है जिसने दशकों से बिहार के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भू-विवादों को जन्म दिया है। सरकार ने इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए अब इसे जड़ से खत्म करने के लिए एक सख्त समय-सीमा निर्धारित की है। अब इस विशेष सर्वे अभियान को अगले दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पहल भूमि संबंधी अनिश्चितताओं को समाप्त करने और एक सुदृढ़ देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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अधूरे सर्वे का खामियाजा और समाधान की उम्मीद

बिना सर्वे वाली जमीनें अक्सर विवादों का केंद्र बनती हैं, जिससे अदालतों में मुकदमों की संख्या बढ़ती है और विकास परियोजनाओं में भी बाधाएं आती हैं। एक स्पष्ट और अद्यतन बिहार भू-अभिलेख प्रणाली की अनुपस्थिति किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने से भी वंचित करती है। यह अभियान न केवल भूमि के स्वामित्व को स्पष्ट करेगा, बल्कि इससे राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। सरकार के इस कदम से उम्मीद जगी है कि अब जमीनी स्तर पर पारदर्शिता आएगी और भूमि संबंधी धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी।

राजस्व मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि सरकार इस अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन और जनशक्ति जुटाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेष सर्वेक्षण दल अब प्राथमिकता के आधार पर इन बिना सर्वे वाली जमीनों का माप-जोख और रिकॉर्ड तैयार करेंगे। इस पहल से लाखों लोगों को अपनी जमीन का वैध अधिकार मिल सकेगा, जिससे उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह अभियान समय पर और त्रुटिरहित तरीके से संपन्न हो, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की जटिलता न उत्पन्न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस ऐतिहासिक फैसले से बिहार के भूमि प्रबंधन में एक नया अध्याय जुड़ेगा।

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