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Labour Code Strike: भागलपुर में मजदूरों का हल्ला बोल, सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर निकाली रैली, जानें क्या हैं मांगें

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Labour Code Strike: सड़कों पर जब नारों का सैलाब उमड़ता है, तो हुकूमत की चूलें हिल जाती हैं। भागलपुर की सड़कों पर आज कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जहां मजदूरों का हुजूम अपने हक़ की आवाज बुलंद करने और मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ उतरा। केंद्र सरकार के चार लेबर कोड्स के विरोध में आहूत देशव्यापी आम हड़ताल का भागलपुर में व्यापक असर देखने को मिला, जिसमें बड़ी संख्या में संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों ने हिस्सा लिया।

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Labour Code Strike के खिलाफ सड़क पर उतरे मजदूर

हड़ताल के समर्थन में सैकड़ों मजदूर भागलपुर के स्थानीय स्टेशन चौक पर एकत्रित हुए। यहां से उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए शहर के प्रमुख मार्गों पर एक विशाल जुलूस निकाला। हाथों में झंडे, बैनर और मांग पट्टिकाएं लिए प्रदर्शनकारी मुख्य बाजार, खलीफाबाग, घंटाघर चौक और बड़ी पोस्ट ऑफिस के रास्ते होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान पूरा शहर नारों से गूंजता रहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कलेक्ट्रेट परिसर में एक विरोध सभा का आयोजन किया गया, जिसके बाद जिला पदाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम एक संयुक्त मांगपत्र सौंपा गया।

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इस संयुक्त प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू के मुकेश मुक्त, सीटू के दशरथ प्रसाद, एटक के डॉ. सुधीर शर्मा, इंटक के ई. रवि कुमार, सेवा की उजरा बानो और एआईयूटीयूसी के दीपक कुमार ने किया। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी इस हड़ताल को अपना सक्रिय समर्थन दिया।

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मालिकों को गुलामी कराने की खुली छूट देता है लेबर कोड

कलेक्ट्रेट पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार लेबर कोड पर झूठा प्रचार कर रही है, लेकिन अब देश का मजदूर कॉरपोरेटों की दलाल सरकार के झांसे में नहीं आने वाला है। उन्होंने कहा, “लेबर कोड कानून मजदूरों के अस्तित्व के लिए खतरा है। महंगाई और बेरोजगारी ने पहले ही गरीबों और मजदूरों का जीवन संकट में डाल दिया है। इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय, सरकार मजदूरों के बचे-खुचे कानूनी और सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों को भी खत्म करने पर तुली हुई है।” नेताओं ने आरोप लगाया कि इन कानूनों के जरिए मालिकों को काम के घंटे बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी खत्म करने और हड़ताल करने के अधिकार को लगभग समाप्त करने की खुली छूट दी जा रही है, जो कि किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कई असंगठित मजदूर इस बात से चिंतित हैं कि उनके भविष्य का क्या होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

वहीं, संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने किसानों को एमएसपी की गारंटी तो नहीं दी, लेकिन अमेरिका के साथ हुए सौदे में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलकर किसानों के साथ धोखा किया है। इससे देश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी सरकार ने देश की साख को गिरवी रख दिया है। इस जुलूस प्रदर्शन में विभिन्न संगठनों के सैकड़ों पुरुष और महिला कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने सरकार से इन मजदूर-विरोधी कानूनों को तत्काल वापस लेने की मांग की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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