

Mahashivratri 2026: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि भगवान शिव को समर्पित महाशिवरात्रि का महापर्व, महादेव के भक्तों के लिए असीम ऊर्जा और कृपा प्राप्त करने का स्वर्ण अवसर लेकर आता है। इस पावन निशा में भगवान शिव के 1008 नामों का जाप करना न केवल आत्मिक शुद्धि प्रदान करता है, बल्कि समस्त कष्टों का निवारण कर जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार भी खोल देता है।
महाशिवरात्रि 2026: महादेव के 1008 नामों का जाप, खोलेगा भाग्य के कपाट
महाशिवरात्रि 2026: शिव सहस्रनाम जाप की महिमा
महाशिवरात्रि की महानिशा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति अर्पित करने का एक अनुपम पर्व है। ऐसी मान्यता है कि इस रात्रि में महादेव अपनी तांडव मुद्रा में सृजन और संहार दोनों का कार्य करते हैं। इस पवित्र समय में उनके 1008 दिव्य नामों का स्मरण करना, जिसे ‘शिव सहस्रनाम’ भी कहा जाता है, साधक को अलौकिक शक्ति और मानसिक शांति प्रदान करता है। यह केवल नामों का उच्चारण नहीं, बल्कि महादेव के विराट स्वरूप से जुड़ने का एक आध्यात्मिक महायज्ञ है जो जीवन के समस्त अंधकारों को मिटाकर भाग्य और आरोग्य के बंद द्वार खोल देता है। यह साधना अनंत ब्रह्मांडीय ऊर्जा को जाग्रत करती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। दैनिक जीवन की समस्याओं से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए शिव सहस्रनाम का पाठ अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/dharm-adhyatm/
महाशिवरात्रि पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी होती है। यहाँ पूजा की सरल विधि दी गई है:
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद पुष्प और अक्षत चढ़ाएं।
- चंदन का लेप लगाएं और धूप-दीप प्रज्ज्वलित करें।
- भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें।
- फलों और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- महाशिवरात्रि व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
- आरती कर प्रसाद वितरित करें।
महाशिवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त
| तिथि | विवरण | समय |
|---|---|---|
| 26 फरवरी 2026 | चतुर्दशी तिथि आरंभ | प्रातः 08:35 बजे से |
| 27 फरवरी 2026 | चतुर्दशी तिथि समाप्त | प्रातः 05:46 बजे तक |
| 26-27 फरवरी 2026 | निशिता काल पूजा | मध्यरात्रि 24:09 से 24:59 (50 मिनट) |
| 27 फरवरी 2026 | पारण का समय | प्रातः 06:49 से दोपहर 03:35 तक |
शिव सहस्रनाम जाप का महत्व और कथा
शास्त्रों में वर्णित है कि महाशिवरात्रि की रात्रि में भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसी कारण यह रात्रि अत्यंत पावन मानी जाती है। शिव सहस्रनाम का जाप करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह जाप भक्तों को रोग-दोष से मुक्त कर दीर्घायु प्रदान करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
ॐ नमः शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नमः ॐ
निष्कर्ष और उपाय
महाशिवरात्रि 2026 पर भगवान शिव के 1008 नामों का जाप करना एक दिव्य अनुभव है जो आपकी आत्मा को शुद्ध करता है और आपको महादेव के करीब लाता है। इस महापर्व पर सच्चे मन से की गई आराधना निश्चित रूप से आपके जीवन में शांति, समृद्धि और कल्याण लाएगी। यदि आप शिव सहस्रनाम का पूर्ण पाठ करने में असमर्थ हैं, तो आप “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं या शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। यह रात्रि आपकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हो, महादेव का आशीर्वाद आप पर सदैव बना रहे।


