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फ़रवरी, 16, 2026
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Patna NEET Student Case: नीट छात्रा की मौत का रहस्य गहराया, मानवाधिकार आयोग का संज्ञान, पटना SSP से मांगी रिपोर्ट!

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पटना नीट स्टूडेंट केस: हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत, मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, पटना SSP से मांगी रिपोर्ट!

Patna NEET Student Case: असमय बुझ गई एक नन्हीं जान की चिंगारी, और अब इस प्रकरण की गूंज राज्य मानवाधिकार आयोग के गलियारों तक पहुँच गई है। यह सिर्फ एक छात्र की कहानी नहीं, बल्कि शिक्षा के मंदिर में सुरक्षा पर उठते गंभीर सवालों का जवाब तलाशने की कवायद है।

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पटना नीट स्टूडेंट केस: मानवाधिकार आयोग की गंभीर पहल

पटना में एक नीट छात्रा की दुखद और रहस्यमयी मौत का मामला अब एक बड़े मोड़ पर आ पहुँचा है। इस संवेदनशील घटना को राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है, जिससे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की उम्मीद बढ़ गई है। प्रतिष्ठित अधिवक्ता एस.के. झा ने इस प्रकरण को बेहद गंभीर बताते हुए अपनी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने तत्काल कदम उठाते हुए पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। यह घटना शिक्षा के गढ़ में छात्रों की सुरक्षा पर गहरे प्रश्नचिह्न लगाती है, और आयोग का यह हस्तक्षेप न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। छात्रा की मौत के बाद से ही पटना के शैक्षणिक गलियारों में एक अजीब सा डर और बेचैनी का माहौल है, जिसे इस छात्रावास प्रकरण की गहन जांच ही शांत कर सकती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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जांच का दायरा और आगे की राह

राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा पटना SSP से रिपोर्ट मांगे जाने का अर्थ है कि अब पुलिस को इस पूरे मामले की परत-दर-परत जांच करनी होगी। इसमें न केवल छात्रा की मौत के कारणों की पड़ताल की जाएगी, बल्कि हॉस्टल प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर गहन छानबीन होगी। आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। अधिवक्ता एस.के. झा के अनुसार, आयोग का यह कदम न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सहायक होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए भी एक नज़ीर पेश करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे की कार्रवाई का निर्धारण करेगा, जिसमें आवश्यक दिशानिर्देश जारी करना या संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना शामिल हो सकता है। यह छात्रावास प्रकरण अब सिर्फ एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि व्यवस्थागत खामियों को उजागर करने वाला एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है, और देशज टाइम्स बिहार का N0.1 इसकी हर बारीकी पर नजर बनाए हुए है।

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