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सूर्य ग्रहण 2026: जानिए क्या करें और क्या न करें, इसका प्रभाव और सावधानियां

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Surya Grahan 2026: आकाशीय पिंडों की चाल, ब्रह्मांड की अद्भुत लीला और ज्योतिषीय महत्व, इन सभी का संगम है सूर्य ग्रहण। यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जो न केवल वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल का विषय है, बल्कि सनातन धर्म में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है। जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो सूर्य का प्रकाश धरती तक नहीं पहुंच पाता, और यही स्थिति सूर्य ग्रहण कहलाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दौरान निकलने वाली ऊर्जा पृथ्वी के जीवों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में यह जानना अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि इस दौरान हमें क्या करना चाहिए और किन सावधानियों का पालन करना चाहिए, ताकि इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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सूर्य ग्रहण 2026: जानिए क्या करें और क्या न करें, इसका प्रभाव और सावधानियां

सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान रखें इन बातों का विशेष ध्यान

धर्म ग्रंथों और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है जिसका प्रभाव संपूर्ण सृष्टि पर पड़ता है। यह समय आत्मचिंतन, जप-तप और ईश्वर स्मरण के लिए उत्तम माना जाता है। नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए कई नियम और विधान बताए गए हैं।

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ग्रहण काल में क्या करें?

  • ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान कर पवित्र हो जाएं।
  • ग्रहण काल में भगवान के नाम का जप करें, विशेषकर महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, या सूर्य मंत्र का पाठ करें।
  • गर्भवती महिलाएं घर के अंदर रहें और नुकीली चीजों का प्रयोग न करें।
  • ग्रहण समाप्त होने पर पुनः स्नान करें और पुराने वस्त्रों का त्याग करें या धो लें।
  • ग्रहण के बाद दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अनाज, वस्त्र, धन या गाय का दान कर सकते हैं।
  • पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो सके।

ग्रहण काल में क्या न करें?

  • सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से बिल्कुल न देखें, यह आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • ग्रहण काल में भोजन करना, पानी पीना, सोना या कोई भी शुभ कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है।
  • गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
  • देव मूर्तियों को स्पर्श न करें और पूजा-पाठ से बचें।
  • बाल काटना, नाखून काटना या सिलाई जैसे कार्य भी ग्रहण काल में नहीं करने चाहिए।
  • तुलसी के पत्ते और पके हुए भोजन में कुश या तुलसी दल डाल दें, ताकि वे अशुद्ध न हों।

सूतक काल और उसका महत्व

सूर्य ग्रहण से पहले का समय सूतक काल कहलाता है। यह वह अवधि है जब ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों की शुरुआत मानी जाती है और इस दौरान कई तरह के शुभ कार्यों से बचना चाहिए। सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, भगवान की मूर्तियों को छूना और किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।

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आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

विवरणसमयतारीख
सूर्य ग्रहण 2026(समय अभी निश्चित नहीं है, अनुमानित)12 अगस्त 2026
सूतक प्रारंभ (अनुमानित)रात 08:30 बजे11 अगस्त 2026
सूतक समाप्त (अनुमानित)सुबह 08:30 बजे (ग्रहण के साथ)12 अगस्त 2026

ग्रहण दोष शांति के मंत्र

ग्रहण के दौरान जप करने से इसके बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ग्रहण के बाद इन मंत्रों का जाप और स्नान के बाद दान-पुण्य करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है। यह एक ऐसी खगोलीय घटना है जो हमें प्रकृति के विशाल स्वरूप और उसके नियमों का स्मरण कराती है। इसके नियमों का पालन कर हम स्वयं को और अपने परिवार को संभावित नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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