back to top
⮜ शहर चुनें
फ़रवरी, 17, 2026
spot_img

Amalaki Ekadashi: आमलकी एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

spot_img
- Advertisement - Advertisement

Amalaki Ekadashi: हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

- Advertisement -

आमलकी एकादशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Amalaki Ekadashi: हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह पावन पर्व विशेष रूप से भगवान श्री हरि विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा के लिए समर्पित है। वर्ष 2026 में, यह शुभ एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आमलकी एकादशी का सीधा संबंध आंवले के वृक्ष से है, जिसमें स्वयं भगवान विष्णु का वास माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में वर्णित है कि आंवले के वृक्ष में स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु का वास होता है, और यह एक ऐसा पावन अवसर है जब अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकते हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

- Advertisement -

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Surya Grahan 2026: जानिए कब, कहां और इसका प्रभाव

Amalaki Ekadashi का महत्व और पूजा विधि

आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की थी, तब उन्होंने भगवान विष्णु की नाभि से आंवले के वृक्ष को उत्पन्न किया था। इस वृक्ष के हर अंग में देवताओं का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

आमलकी एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

यह मुहूर्त सामान्य गणनाओं पर आधारित है। अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार सटीक समय के लिए विशेषज्ञों से परामर्श लें।

आमलकी एकादशी पूजा विधि

आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा इस प्रकार करें:

  • एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • अब आंवले के वृक्ष के पास जाएं और उसे शुद्ध जल अर्पित करें।
  • वृक्ष के तने पर रोली, चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  • वस्त्र, जनेऊ और नैवेद्य (भोग) अर्पित करें।
  • धूप और दीप जलाकर आंवले के वृक्ष की आरती करें।
  • वृक्ष की परिक्रमा करें और अपनी मनोकामनाएं कहें।
  • भगवान विष्णु की पूजा करते समय निम्न मंत्र का जाप करें:

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

  • यह आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर निराहार रहना चाहिए या फलाहार ग्रहण करना चाहिए।
  • द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करें।
यह भी पढ़ें:  फाल्गुन अमावस्या 2026: पितृ शांति और ग्रह दोष निवारण का महापर्व

आमलकी एकादशी का फल और उपसंहार

आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को आरोग्य, धन, संतान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या आंवले का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है और उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

सिद्धांत चतुर्वेदी: जब स्कूल में लुक को लेकर उड़ता था मजाक, बोले – बालों को स्ट्रेट करने की करता था कोशिश

Siddhant Chaturvedi News: बॉलीवुड के चमकते सितारे सिद्धांत चतुर्वेदी आजकल अपनी अपकमिंग फिल्म 'दो...

JEE Main जनवरी सत्र के परिणाम: कोटा ने फिर लहराया सफलता का परचम, 7 छात्रों ने हासिल किए 100 पर्सेंटाइल

JEE Main: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित जेईई-मेन्स जनवरी सत्र के नतीजों ने...

AI Healthcare: भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति, JP नड्डा ने लॉन्च किए SAHI और BODH

AI Healthcare: भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का भविष्य अब सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें