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मार्च, 9, 2026
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फाल्गुन अमावस्या 2026: पितृ शांति और ग्रह दोष निवारण का महापर्व

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Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि भारतीय सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस पावन दिवस पर स्नान, दान और पितरों के निमित्त कर्मकांड करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को यह शुभ तिथि पड़ रही है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना देती है।

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# फाल्गुन अमावस्या 2026: पितृ शांति और ग्रह दोष निवारण का महापर्व

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## फाल्गुन अमावस्या 2026 का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

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हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है, किंतु फाल्गुन अमावस्या का अपना एक विशिष्ट स्थान है। यह दिन पितृ तर्पण के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है, जिससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या तिथि पर किए गए दान-पुण्य से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस दिन ग्रह शांति के लिए भी विशेष उपाय किए जाते हैं।

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**फाल्गुन अमावस्या का महत्व**

यह अमावस्या फाल्गुन मास में आती है, जो भगवान शिव और विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम मानी जाती है। इस दिन शनि देव की आराधना का भी विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस दिन किए गए कर्मकांड से कुंडली में मौजूद पितृ दोष और कालसर्प दोष जैसे गंभीर दोषों से मुक्ति मिलती है।

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**शुभ मुहूर्त**

| तिथि | समाप्ति समय |
| :————- | :—————————- |
| फाल्गुन अमावस्या | 17 फरवरी 2026, शाम 05 बजकर 23 मिनट तक |

**पूजा विधि**

फाल्गुन अमावस्या के दिन पितरों को प्रसन्न करने और ग्रह दोष शांति के लिए निम्न विधि से पूजा-अर्चना की जा सकती है:
* प्रातःकाल उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।
* सूर्य देव को अर्घ्य दें और पितरों के निमित्त जल अर्पित करें।
* ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।
* पीपल के वृक्ष की पूजा करें और जल चढ़ाएं। दीपक प्रज्वलित करें।
* इस दिन काले तिल, वस्त्र, अन्न आदि का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
* गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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**मंत्र**

पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जाप करें:
> ॐ पितृभ्यः नमः।
> ॐ सर्व पितृ देवाय नमः।

**उपाय और विशेष अनुष्ठान**

इस अमावस्या पर शनि दोष से मुक्ति के लिए शनि देव के मंत्रों का जाप करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके अतिरिक्त, कालसर्प दोष से पीड़ित व्यक्ति इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर सकते हैं। यह दिन पूर्वजों की स्मृति में दीपदान करने के लिए भी सर्वोत्तम है।

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**निष्कर्ष**

फाल्गुन अमावस्या का यह पावन पर्व हमें अपने पूर्वजों का स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इस दिन किए गए छोटे से छोटे शुभ कर्म भी हमारे जीवन में बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन सच्चे मन से किए गए प्रयासों से न केवल पितृ दोष शांत होते हैं, बल्कि पितृ तर्पण से पूर्वजों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि एवं आरोग्य का वास होता है।

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