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फ़रवरी, 20, 2026
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Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया और स्नान-दान के शुभ नियम, पढ़िए होलिका दहन पर इसका प्रभाव!

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Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा का पावन अवसर हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ आ रही है, जब चंद्रमा पर ग्रहण का साया रहेगा। यह स्थिति भक्तों के मन में कई प्रश्न उत्पन्न कर रही है कि इस दौरान स्नान-दान कैसे करें और होलिका दहन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

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फाल्गुन पूर्णिमा 2026: चंद्र ग्रहण का साया और स्नान-दान के शुभ नियम

फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह वह शुभ अवसर है जब होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है और अगले दिन रंगोत्सव, होली खेली जाती है। सनातन परंपरा के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की पूजा, सत्यनारायण कथा का पाठ और पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करने से सभी कष्टों का निवारण होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बना देता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ग्रहण काल का प्रभाव धार्मिक कार्यों पर पड़ता है, इसलिए इस दिन विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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फाल्गुन पूर्णिमा 2026 पर चंद्र ग्रहण और सूतक काल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण लगता है, तो उसका एक निश्चित सूतक काल होता है। सूतक काल वह समय होता है जब नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है और किसी भी शुभ कार्य को करना वर्जित माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा पर लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य होगा या नहीं, इसकी जानकारी ग्रहण के सटीक समय पर निर्भर करेगी। यदि ग्रहण भारत में दृश्य होता है, तो सूतक काल के नियमों का पालन अनिवार्य होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है और ग्रहण समाप्ति के साथ ही समाप्त होता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, पूजा-पाठ वर्जित होता है और भोजन बनाना या ग्रहण करना भी मना होता है। गर्भवती महिलाओं और वृद्धजनों को विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

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होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

होलिका दहन का पर्व फाल्गुन पूर्णिमा की रात को ही मनाया जाता है। चूंकि 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लग रहा है, तो ऐसे में होलिका दहन के समय पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यदि ग्रहण काल होलिका दहन के मुहूर्त के साथ ही आ रहा है, तो होलिका दहन ग्रहण समाप्ति के बाद या ग्रहण से पहले करना शुभ होगा। हालांकि, अधिकतर चंद्र ग्रहण मध्यरात्रि के बाद होते हैं, जिससे होलिका दहन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। यह आवश्यक है कि होलिका दहन के लिए शुद्ध और ग्रहण-मुक्त मुहूर्त का चयन किया जाए ताकि पर्व की पवित्रता बनी रहे।

स्नान-दान का महत्व और शुभ मुहूर्त

ग्रहण काल समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। इसे ग्रहण के दुष्प्रभावों को दूर करने और पुण्य प्राप्त करने का सबसे उत्तम उपाय माना जाता है। यदि नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। ग्रहण समाप्ति के बाद अन्न, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान करना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह दान किसी ब्राह्मण, गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को देना चाहिए।

ग्रहण के बाद स्नान-दान के लिए शुभ मुहूर्त (उदाहरणार्थ):

तिथिघटनासमय
3 मार्च 2026चंद्र ग्रहण समाप्ति(उदाहरण के लिए) प्रातः 06:30 बजे
3 मार्च 2026स्नान-दान प्रारंभ(उदाहरण के लिए) प्रातः 06:45 बजे से
3 मार्च 2026दिन भरदान-पुण्य के लिए शुभ
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*यह ध्यान दें कि उपरोक्त समय केवल उदाहरण के लिए हैं। ग्रहण के सटीक समय और दृश्यता के अनुसार मुहूर्त में परिवर्तन हो सकता है। कृपया अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषी से पुष्टि करें।*

क्या करें और क्या न करें

  • ग्रहण के दौरान क्या करें:
    • ईश्वर का स्मरण करें।
    • अपने इष्ट देव के मंत्रों का जाप करें।
    • गर्भवती महिलाएं घर के अंदर रहें।
    • जल में तुलसी डालकर रखें ताकि उसका शुद्धिकरण हो।
  • ग्रहण के दौरान क्या न करें:
    • भोजन न करें।
    • सोएं नहीं।
    • किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग न करें।
    • देव दर्शन या मूर्ति स्पर्श न करें।
    • नए कार्य की शुरुआत न करें।
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निष्कर्ष और उपाय

फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का लगना एक दुर्लभ संयोग है। ऐसे में धैर्य और श्रद्धा के साथ धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण के उपरांत विधि-विधान से स्नान और दान कर आप इसके नकारात्मक प्रभावों से बच सकते हैं और पुण्य कमा सकते हैं। ग्रहण के बाद शिव चालीसा का पाठ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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