

Patna DM Office: पटना के डीएम कार्यालय पर सियासी हलचल किसी पुरानी हवेली में छिड़ी नई बहस जैसी है। एक ओर इतिहास अपनी पहचान बचाने को बेताब है, तो दूसरी ओर विकास की रफ्तार नए ठिकाने की तलाश में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बिहार विधान परिषद में इस मुद्दे ने एक नया और गहरा मोड़ ले लिया है। जनता दल (यूनाइटेड) के सदस्य नीरज कुमार ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पटना का पुराना डीएम ऑफिस केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि डच शैली का एक अद्भुत नमूना है। यह इमारत कई ऐतिहासिक घटनाओं की गवाह रही है और इसकी अपनी सांस्कृतिक विरासत है।
Patna DM Office: इतिहास बनाम आधुनिकता की जंग
पटना की यह ऐतिहासिक इमारत, जिसे हम पुराना डीएम कार्यालय कहते हैं, डच वास्तुकला का एक बेजोड़ उदाहरण है। इसका हर कोना बीते युग की कहानियाँ बयाँ करता है। नीरज कुमार ने तर्क दिया कि इसे ध्वस्त करना शहर की आत्मा और उसकी पहचान को मिटाने जैसा होगा। उन्होंने इसे एक संग्रहालय या सांस्कृतिक केंद्र में बदलने का सुझाव दिया, ताकि इसकी ऐतिहासिक महत्ता को संरक्षित रखा जा सके।
हालांकि, सरकार का पक्ष आधुनिक प्रशासन की जरूरतों पर केंद्रित है। नया डीएम कार्यालय भवन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें अधिकारियों और जनता दोनों को बेहतर सेवाएँ मिल सकेंगी। मौजूदा भवन की जर्जर हालत और जगह की कमी को देखते हुए, एक नए और विशालकाय प्रशासनिक केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इस बहस के बीच, पटना के शहरी विकास की दिशा तय करने में यह निर्णय महत्वपूर्ण साबित होगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विरासत का संरक्षण और विकास की अनिवार्यता
यह केवल एक इमारत का मामला नहीं, बल्कि विरासत के संरक्षण और विकास की अनिवार्यता के बीच संतुलन स्थापित करने का एक बड़ा सवाल है। जहाँ एक ओर शहर की पहचान डच वास्तुकला जैसी पुरानी इमारतों में निहित है, वहीं दूसरी ओर भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे पर जनता की राय भी बंटी हुई है। कुछ लोग विरासत को बचाने की वकालत कर रहे हैं, तो कुछ लोग नए और आधुनिक बुनियादी ढांचे के पक्ष में हैं।
बिहार सरकार को इस संवेदनशील मामले में एक ऐसा रास्ता खोजना होगा, जिससे पटना की ऐतिहासिक गरिमा भी बनी रहे और जनता को कुशल और आधुनिक प्रशासन की सुविधा भी मिल सके। विधान परिषद में जारी यह बहस जल्द ही किसी निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकती है, जिसका असर पटना के भविष्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


