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फ़रवरी, 26, 2026
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AI Deepfake News: अब फेक कंटेंट बनाने वालों की खैर नहीं!

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AI Deepfake News: डिजिटल युग में जहां सूचनाओं का सैलाब है, वहीं गलत सूचनाओं और डीपफेक का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।

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AI Deepfake News: अब फेक कंटेंट बनाने वालों की खैर नहीं!

AI Deepfake News पर सरकार का कड़ा रुख

डिजिटल युग में जहां सूचनाओं का सैलाब है, वहीं गलत सूचनाओं और AI Deepfake News का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि टेक और सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी। यह एक बड़ा कदम है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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दिल्ली में आयोजित डीएनपीए कार्यक्रम में मंत्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि डीपफेक और फेक न्यूज न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के लिए खतरा हैं, बल्कि समाज में अशांति फैलाने और गलत धारणाएं बनाने का भी एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। उनकी यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब AI-जनित नकली तस्वीरों और वीडियो का प्रसार चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति से संबंधित AI कंटेंट बनाने से पहले उसकी स्पष्ट उपभोक्ता सहमति लेना अनिवार्य होगा। यह कदम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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सरकार का मानना है कि केवल तकनीकी समाधान ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्लेटफॉर्म्स को नैतिक और कानूनी रूप से भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इस संदर्भ में, यह भी गौरतलब है कि उपभोक्ता सहमति के बिना बनाए गए AI कंटेंट को अब गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित कंपनियों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा। लेटेस्ट कार और बाइक अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें

कंपनियों की बढ़ेगी जवाबदेही

मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी नीतियों को और अधिक मजबूत करना होगा ताकि फर्जी कंटेंट को प्रसारित होने से रोका जा सके। यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक बड़ी बहस का मुद्दा बन चुका है कि कैसे तकनीक का उपयोग करते हुए गलत सूचनाओं के प्रसार को रोका जाए। सरकार का यह रुख दर्शाता है कि भविष्य में AI से जुड़े कंटेंट निर्माण में पारदर्शिता और नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य एक सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जहां यूजर्स की निजता और पहचान को कोई खतरा न हो। यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रत्येक जानकारी की प्रामाणिकता बनी रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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