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मार्च, 9, 2026
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Darbhanga News: DMCH एंबुलेंस चालक बना दिहाड़ी मजदूर, सुदीश यादव की कहानी में पढ़िए जिले के एंबुलेंस चालकों की भुखमरी और उखड़ती सांसे

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Darbhanga News: जो जिंदगियां बचाते हैं, आज उनकी अपनी जिंदगी दांव पर लगी है। जो दिन-रात अपनी गाड़ी में सांसे लेकर दौड़ते हैं, आज वही अपनी जीविका की सांसे उखड़ते देख रहे हैं। यह दर्दनाक तस्वीर दरभंगा की है, जहां एंबुलेंस चालक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं।

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Darbhanga News: जिले की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था का इससे बड़ा उदाहरण और क्या होगा कि जिस एंबुलेंस से मरीजों को जीवनदान मिलता है, उसी को चलाने वाले सारथी आज दाने-दाने को मोहताज हैं। दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (DMCH) में 102 एंबुलेंस (BR01PN 1160) चलाने वाले सुदीश यादव की कहानी इस पूरी व्यवस्था की पोल खोल देती है। वेतन न मिलने के कारण सुदीश अब एक दिहाड़ी मजदूर बन गए हैं, ताकि अपने परिवार का पेट पाल सकें।

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Darbhanga News: वेतन के अभाव में जिंदगी की गाड़ी पटरी से उतरी

सुदीश यादव कोई अकेले नहीं हैं, बल्कि यह कहानी जिले के लगभग सभी एम्बुलेंस चालकों की है। इन कर्मियों का संचालन जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड नामक एक निजी एजेंसी करती है। आरोप है कि यह एजेंसी सरकार के नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों का शोषण कर रही है। ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें समय पर न तो वेतन मिलता है, न ही उनका ESIC और PF का पैसा जमा किया जाता है। जब कोई कर्मचारी अपने हक की आवाज उठाने की कोशिश करता है, तो उसे नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती है।

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यह स्थिति तब है जब सरकारी नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी कर्मचारी का वेतन महीने की 1 से 7 तारीख के बीच हर हाल में भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन दरभंगा में एंबुलेंस कर्मियों को फरवरी माह का वेतन होली से पहले भी नहीं दिया गया, जिससे उनके त्योहार का रंग भी फीका पड़ गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एजेंसी की मनमानी और संघ का आरोप

पूरे मामले की जड़ में एम्बुलेंस संचालन का जिम्मा संभालने वाली जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। कर्मचारियों के अनुसार, कंपनी प्रबंधन से बात करने पर हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, लेकिन नतीजा शून्य रहता है। एक एम्बुलेंस चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे सब बेबस हैं, क्योंकि अगर वे शिकायत करते हैं तो उनके परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

इस पूरे मामले पर बिहार एम्बुलेंस कर्मचारी संघ, दरभंगा के जिलाध्यक्ष दयानंद शर्मा ने भी अपनी मुहर लगा दी है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी एम्बुलेंस कर्मियों की यही स्थिति है। कंपनी द्वारा समय पर वेतन, ईएसआईसी और पीएफ का भुगतान नहीं किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि जो भी कर्मचारी इसके खिलाफ आवाज उठाता है, उसे काम से हटा दिया जाता है। शर्मा ने कहा कि यह सीधे तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है और सरकार को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, वरना ये जीवनदाता खुद ही टूट जाएंगे।

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