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फ़रवरी, 27, 2026
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Panneerselvam DMK: तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़, ओ पनीरसेल्वम ने थामा DMK का हाथ

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राजनीति की बिसात पर मोहरों का बदलना कोई नई बात नहीं, पर जब धुर विरोधी पाले में जा बैठे, तो हलचल स्वाभाविक है। Panneerselvam DMK: तमिलनाडु में बीते शुक्रवार को एक बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब अन्नाद्रमुक के तीन बार मुख्यमंत्री रहे ओ पनीरसेल्वम ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) का दामन थाम लिया।

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Panneerselvam DMK: क्यों हुआ यह अप्रत्याशित गठबंधन?

शुक्रवार को मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की उपस्थिति में पनीरसेल्वम ने अपने समर्थकों के साथ द्रमुक की सदस्यता ग्रहण की। यह घटना तमिलनाडु की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। दिवंगत अन्नाद्रमुक सुप्रीमो जे जयललिता के बेहद करीबी माने जाने वाले पनीरसेल्वम को 2022 में अन्नाद्रमुक से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद से ही वे अपने मातृ संगठन में वापसी के लिए लगातार तीन वर्षों से असफल प्रयास कर रहे थे।

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इस कदम को पनीरसेल्वम के राजनीतिक करियर में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रहे पनीरसेल्वम के लिए द्रमुक में शामिल होना एक नई उम्मीद की किरण हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस फैसले से राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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ओ पनीरसेल्वम, जो कभी जयललिता की सरकार में मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाल चुके हैं, उनके इस कदम ने तमिलनाडु राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि द्रमुक इसे अपनी राजनीतिक ताकत का विस्तार मान रही है। यह घटना तमिलनाडु राजनीति के भविष्य पर गहरा असर डालेगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

जयललिता के विश्वासपात्र से द्रमुक के सदस्य तक का सफर

पनीरसेल्वम का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। जयललिता के निधन के बाद उन्होंने अन्नाद्रमुक में नेतृत्व के लिए संघर्ष किया, लेकिन अंततः उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। तीन बार मुख्यमंत्री रहे पनीरसेल्वम के लिए अन्नाद्रमुक में वापसी के सभी दरवाजे बंद होने के बाद द्रमुक में शामिल होना ही एकमात्र विकल्प बचा था। यह घटना तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरणों को निश्चित रूप से प्रभावित करेगी और आगामी चुनावों में इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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