

Suniel Shetty News: बॉलीवुड के ‘अन्ना’ सुनील शेट्टी हमेशा ही अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में एक इवेंट में उन्होंने इंडस्ट्री के भीतर अच्छे-बुरे लोगों से लेकर मीडिया के टीआरपी खेल और अपने दामाद के क्रिकेट मैच न देखने तक, कई मुद्दों पर खुलकर बात की है, जिसने फैंस के बीच हलचल मचा दी है।
Suniel Shetty, बॉलीवुड में अच्छे लोग और पैपराजी कल्चर पर क्या बोले ‘अन्ना’?
Suniel Shetty ने बॉलीवुड के ‘अच्छे लोगों’ पर खुलकर की बात
बॉलीवुड के दमदार एक्टर सुनील शेट्टी ने हाल ही में ‘आईडियाज ऑफ इंडिया 2026’ समिट में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे करियर, परिवार, फिल्मों और इंडस्ट्री में अपने संघर्षों पर रौशनी डाली। बातचीत के दौरान, उन्होंने खास तौर पर बॉलीवुड के लोगों, विशेषकर ‘अच्छे लोगों’ को लेकर अपनी राय रखी। सुनील शेट्टी से जब पूछा गया कि क्या बॉलीवुड में अच्छे लोग हैं, तो उन्होंने साफ कहा, “मुझे लगता है कि चाहे एक्टर हो, पॉलीटिशियन हो, सिंगर हो, स्पोर्टसमैन हो या एंटरटेनर हो, वे हमेशा पब्लिक की नजर में रहते हैं। उनके ऊपर नकारात्मक और सकारात्मक, दोनों तरह के कमेंट्स होते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये दुनिया है, इसमें अच्छे लोग भी हैं। उस अच्छाई को आप कैसे बाहर लेकर आते हैं, वो ज़रूरी है। अगर आपकी जड़ें मजबूत हों, तो आपके अंदर अपने आप ग्रेटिट्यूड, सिंपथी आ जाती है। मुझे नहीं लगता कि बॉलीवुड में अच्छे लोग नहीं हैं।” सुनील शेट्टी ने बॉलीवुड से जुड़े एक ‘नैरेटिव’ पर भी चिंता जताई, जैसे ‘ड्रग्स है तो बॉलीवुड है’, ‘मी टू है तो बॉलीवुड है’, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा नहीं है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मीडिया और पैपराजी कल्चर पर अन्ना का बेबाक बयान
अपनी बातचीत को आगे बढ़ाते हुए सुनील शेट्टी ने मीडिया, टीआरपी और पैपराजी कल्चर पर भी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा, “ये सिर्फ बॉलीवुड के बारे में ही नहीं है, आप लाइफ में भी देखें तो यही होता है, क्योंकि अब्यूज इज़ ए व्यूज। टीआरपी तब मिलती है जब आप गाली देते हैं। ये न्यूज़ सही है या नहीं, ये बात नहीं है; ये न्यूज़ पहले मैंने डाली है, ये बात है।” अन्ना ने मीडिया के काम पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यूज़ को वेरिफाई करना मीडिया का काम है और यही जर्नलिज्म और पैपराजी में फर्क है। उन्होंने प्रामाणिक और खूबसूरत पत्रकारिता की वापसी की उम्मीद जताई। सुनील शेट्टी के अनुसार, लोगों के लिए अब मीडिया केवल व्यूज बनकर रह गया है, जहां लोग सोचते हैं कि अच्छा बनूं या बुरा, जिससे उन्हें व्यूज मिलें।
दामाद के मैच देखने से क्यों कतराते हैं सुनील शेट्टी?
अपनी निजी और परिवारिक जीवन के बारे में बात करते हुए सुनील शेट्टी ने एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वह अपने दामाद, क्रिकेटर केएल राहुल के मैच नहीं देखते। इस बात को समझाते हुए उन्होंने कहा, “मैं मैच बिल्कुल भी नहीं देखता, क्योंकि मैं एक Avid क्रिकेट फैन हूं, तो बिल्कुल नहीं देखता। सुनता हूं, पर कॉमेंट्री भी नहीं सुनता।” उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब उनकी पत्नी मैच देखती हैं और अंदर से चिल्लाती हैं, तो वह उनकी बातें सुनकर और उनके एक्सप्रेशन देखकर समझ जाते हैं कि मैच में क्या चल रहा है। हालांकि, वह मैच की हाइलाइट्स जरूर देखते हैं। सुनील शेट्टी ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बहुत नर्वस रहता हूं, क्योंकि बच्चा है। हम यही चाहते हैं वो अच्छा करे, खासकर कमेंट्स की वजह से ऐसा करता हूं, क्योंकि कमेंट्स बहुत होते हैं।” उन्होंने बताया कि खुद के ऊपर कमेंट्स का इतना असर नहीं होता, लेकिन बच्चों के बारे में कुछ भी हो, तो वो पैरेंट्स को काफी प्रभावित करता है, इसलिए वह मैच नहीं देखते। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। सुनील शेट्टी का यह बयान सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है और फैंस उनकी ईमानदारी की दाद दे रहे हैं।
फैंस रिएक्शन और सोशल मीडिया बज
सुनील शेट्टी के इन बेबाक बयानों के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि सुनील शेट्टी ने हमेशा दिल से बात की है और इस बार भी उन्होंने वही किया है। बॉलीवुड की सच्चाई से लेकर मीडिया के बदलते स्वरूप पर उनकी टिप्पणी को काफी सराहा जा रहा है। उनके दामाद केएल राहुल के मैचों को लेकर उनकी भावनाएं भी कई माता-पिता से मिलती-जुलती हैं, जिससे यह बयान आम जनता के बीच भी काफी चर्चा का विषय बन गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
निष्कर्ष
सुनील शेट्टी ने अपनी हालिया बातचीत से एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक बेहतरीन एक्टर ही नहीं, बल्कि एक सुलझे हुए इंसान भी हैं, जो समाज और इंडस्ट्री के मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखने से नहीं हिचकते। उनकी बातें निश्चित रूप से बॉलीवुड, मीडिया और पेरेंटिंग के कई पहलुओं पर सोचने पर मजबूर करती हैं।


