

Neeraj Ghaywan News: फिल्म मेकिंग की दुनिया में कुछ कहानियाँ ऐसी होती हैं जो सीधे दिल में उतर जाती हैं, और इन कहानियों के पीछे का दिमाग अक्सर हमें सोचने पर मजबूर कर देता है। हाल ही में एक ऐसे ही खास मौके पर, जहां बड़े-बड़े दिग्गजों ने देश के भविष्य पर बात की, वहां सिनेमा के मंच से कुछ अनसुने किस्से सामने आए।
नीरज घेवान का खुलासा: ‘होमबाउंड’ की कहानी क्यों झकझोर गई उन्हें?
Neeraj Ghaywan News: एबीपी नेटवर्क के प्रतिष्ठित ‘आइडियाज ऑफ इंडिया 2026’ समिट के शाम के सत्र में, अपनी बेबाक सोच और अनूठी कहानियों के लिए जाने जाने वाले निर्देशक नीरज घेवान, दमदार अभिनेता ईशान खट्टर और बहुमुखी प्रतिभा के धनी विशाल जेठवा ने शिरकत की। इन तीनों ने मिलकर सिनेमा की दुनिया में ‘असली कहानियों’ के महत्व और उनके खोते जा रहे वजूद पर गहराई से चर्चा की। यह सेशन दर्शकों के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं था, जहाँ फिल्मी दुनिया के ये सितारे अपने अनुभवों को साझा कर रहे थे।
नीरज घेवान ने क्यों चुना ‘होमबाउंड’ का रास्ता?
समिट के दौरान जब नीरज घेवान से उनकी आने वाली फिल्म ‘होमबाउंड’ की फिल्म स्टोरी के पीछे की प्रेरणा पूछी गई, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला सच उजागर किया। नीरज ने बताया, “आजकल की फिल्मों से गाँव, गाँव की आत्मा और वहाँ का जीवन गायब होता जा रहा है। यह कुछ ऐसा है जिसे मैं अपनी आँखों से देख रहा हूँ और यह मुझे बहुत खलता है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें एक बार एक कहानी पढ़ने को मिली थी, जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया। “जब मैंने पहली बार वो कहानी पढ़ी, तो मैं सचमुच परेशान हो गया था, इसने मुझे अंदर से झकझोर दिया। लेकिन जब मैंने उसे दो-तीन बार पढ़ा, तो मुझे महसूस हुआ कि इस कहानी में एक बड़े कैनवास पर उतरने की क्षमता है। यह कहानी आज के युवाओं की स्थिति को दर्शाती है और बताती है कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं। मेरी कोशिश थी कि उनके अनुभवों को समझा जाए, क्योंकि यह जानना बहुत जरूरी है कि उनका जीवन कैसे काम करता है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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नीरज घेवान की ‘टेढ़ी’ कहानियों का सच
नीरज घेवान की पिछली फिल्मों को देखते हुए, जब उनसे यह सवाल किया गया कि वे हमेशा ऐसी हटकर और थोड़ी ‘टेढ़ी’ कहानियों पर ही काम क्यों करते हैं, तो उनका जवाब बेहद विचारोत्तेजक था। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “देखिए, यह सब दृष्टिकोण की बात है। शायद मैं तो मंच पर सीधा खड़ा हूँ, लेकिन लोगों को लगता है कि मैं तिरछा खड़ा हूँ।” उन्होंने अपनी पहचान और अपनी जड़ों को स्पष्ट करते हुए कहा, “मैं दलित पृष्ठभूमि से आता हूँ, लेस्बियन महिलाओं और समाज के उन तबकों की बात करता हूँ, जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। शायद इसीलिए मैं उनकी भावनाओं को बेहतर समझ पाता हूँ।” नीरज ने विनम्रता से यह भी जोड़ा, “मैं केवल 25% लोगों की ही बात करता हूँ।” उन्होंने अपनी फिल्म ‘मसान’ का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी एक प्रोड्यूसर को इस फिल्म के माध्यम से दोस्ती के जरिए दुनियाभर के लोगों से जुड़ने का मौका मिला। यह बताता है कि कैसे सच्ची और संवेदनशील फिल्म स्टोरी सरहदों को पार कर दिलों को जोड़ती हैं। यह सब आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




