

Trade License: व्यापारियों के लिए दोहरी मार झेलने वाले दिन अब लदने वाले हैं? क्या एक ही छत के नीचे दो-दो लाइसेंस रखने की मजबूरी अब खत्म होगी? बिहार की सियासत और व्यापारिक गलियारों में यह सवाल अब जोर-शोर से गूंज रहा है, क्योंकि इस मुद्दे को अब विधानसभा में आवाज मिल गई है।
बिहार के लाखों व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। भागलपुर के चैंबर ऑफ कॉमर्स के अभिषेक कुमार जैन द्वारा जीएसटी-निबंधित व्यापारियों के लिए ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता को समाप्त करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव अब बिहार विधानसभा तक पहुंच गया है। इस प्रस्ताव को विधायक रोहित पांडे ने शून्यकाल के दौरान सदन के पटल पर रखकर इस गंभीर मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि यह प्रस्ताव अमल में लाया जाता है, तो यह राज्य के व्यापारिक समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
क्या है Trade License की अनिवार्यता खत्म करने का प्रस्ताव?
चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य अभिषेक कुमार जैन ने पिछले महीने 12 फरवरी को विधायक रोहित पांडे को एक पत्र लिखकर इस समस्या को उजागर किया था। अपने प्रस्ताव में उन्होंने तर्क दिया कि बिहार सरकार वर्तमान में व्यापारियों पर कई तरह के कर लगा रही है, जो न्यायसंगत नहीं लगता। इसी क्रम में नगर निगम द्वारा जारी किया जाने वाला ट्रेड लाइसेंस भी एक अतिरिक्त बोझ है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिन व्यापारियों के पास पहले से जीएसटी नंबर है, उन्हें ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।
जैन का मानना है कि जब कोई व्यापारी जीएसटी निबंधन प्रक्रिया पूरी करता है, तो वह अपने व्यवसाय से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी सरकार को मुहैया करा देता है। ऐसे में, नगर निगम से अलग से ट्रेड लाइसेंस लेना न केवल एक अनावश्यक प्रक्रिया है, बल्कि यह एक तरह का दोहरा अनुपालन और वित्तीय बोझ भी है। उनके अनुसार, ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता केवल उन व्यक्तियों या व्यापारियों के लिए होनी चाहिए जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते हैं। इस कदम से न केवल व्यापारियों का समय और पैसा बचेगा, बल्कि व्यापार करने में भी सुगमता आएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विधायक की पहल से जगी उम्मीद की किरण
विधायक रोहित पांडे ने अभिषेक जैन के प्रस्ताव की गंभीरता को समझते हुए इसे प्राथमिकता दी और विधानसभा में पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने शून्यकाल में इस मुद्दे को रखकर यह साबित किया कि वह आम जनता और व्यापारी वर्ग की समस्याओं के प्रति कितने सजग हैं। विधायक के इस कदम की चहुंओर सराहना हो रही है। यह दिखाता है कि कैसे एक जनप्रतिनिधि आम नागरिक के उचित प्रस्ताव को सही मंच पर उठाकर सकारात्मक बदलाव की नींव रख सकता है।
इस पहल के बाद बिहार के व्यापारिक समुदाय में एक उम्मीद की किरण जगी है। उन्हें विश्वास है कि सरकार उनके इस तर्कसंगत अनुरोध पर गंभीरता से विचार करेगी और जल्द ही जीएसटी-निबंधित व्यापारियों को ट्रेड लाइसेंस के झंझट से मुक्ति दिलाएगी। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले पर क्या निर्णय लेती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस प्रस्ताव के पारित होने से न केवल व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य में एक बेहतर कारोबारी माहौल बनाने में भी मदद मिलेगी, जो सरकार की प्राथमिकता भी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


