

शिमला समाचार: पहाड़ों की रानी शिमला में शुक्रवार का दिन राजनीतिक सरगर्मियों से भरा रहा। नगर निगम की मासिक आम बैठक (MC House Meet) राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई, जब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। इस दौरान महापौर सुरेंद्र चौहान ने सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नौ पार्षदों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन की इस कार्रवाई के बाद सदन में घंटों तक लगातार नारेबाजी और गहमागहमी का माहौल बना रहा, जिसने शहर के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।
शिमला समाचार: महापौर के कार्यकाल विस्तार पर तीखी बहस
भाजपा पार्षदों ने महापौर के कार्यकाल के विस्तार के मुद्दे पर बैठक में जमकर व्यवधान डाला। सदन से बाहर जाने का निर्देश दिए जाने के बावजूद, उन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी और यह दावा किया कि चूंकि महापौर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसलिए उन्हें निर्वाचित पार्षदों को निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं है। यह नारेबाजी कई मिनट तक जारी रही, जिससे बैठक की कार्यवाही पूरी तरह से ठप हो गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विपक्ष के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि जब तक नई महिला महापौर का चुनाव नहीं हो जाता, वे नगर निगम की किसी भी कार्यवाही को नहीं चलने देंगे।
टकराव की शुरुआत उस समय हुई जब विपक्षी पार्षदों ने महापौर चौहान को सदन की अध्यक्षता करने से रोकते हुए कहा कि उन्हें बैठक संचालित करने का कोई अधिकार नहीं है। भाजपा नेताओं का तर्क था कि महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाला अध्यादेश छह जनवरी 2026 को समाप्त हो गया है और राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में कोई नई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इस मुद्दे पर तीखी बहस ने सदन के माहौल को और गरमा दिया।
महिला महापौर की मांग और कांग्रेस का पलटवार
इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच कांग्रेस पार्षदों ने भी जवाबी नारेबाजी की। उन्होंने भाजपा पर जानबूझकर बैठक बाधित करने और जनविरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना था कि विपक्ष शहर के विकास के बजाय सिर्फ राजनीति चमकाने में लगा हुआ है।
बाद में, भाजपा पार्षदों ने मीडिया से बात करते हुए अपने आरोपों को दोहराया। उन्होंने कहा, “हमारा महापौर से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है, लेकिन आरक्षण रोस्टर के अनुसार अब एक महिला को महापौर चुना जाना चाहिए।” पार्षदों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस का “महिला-विरोधी रुख” खुलकर सामने आ गया है, क्योंकि वे नियमों के विरुद्ध जाकर मौजूदा महापौर का कार्यकाल जारी रखना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह सियासी घमासान शहर के मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिमला नगर निगम में महापौर के कार्यकाल और महिला महापौर की मांग को लेकर यह खींचतान क्या नया मोड़ लेती है।


