

Ajit Pawar Plane Crash: आसमान में उड़ानें हमेशा ही सुरक्षा के कसौटियों पर खरी उतरनी चाहिए, लेकिन जब नियमों की डोर ढीली पड़े तो बड़े से बड़े मंसूबे भी ज़मीन पर आ गिरते हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ हुई घटना एक ऐसी ही त्रासदी की भयावह तस्वीर पेश करती है।
अजित पवार प्लेन क्रैश: बारामती विमान हादसे पर AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़े खुलासे, जानें सुरक्षा चूक की वजह!
अजित पवार प्लेन क्रैश: क्या कहती है प्रारंभिक जांच रिपोर्ट?
Ajit Pawar Plane Crash: विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने शनिवार को बारामती के पास हुए दुर्भाग्यपूर्ण विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट ने उन परिस्थितियों पर प्रकाश डाला है, जिनमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य लोगों की जान चली गई थी। यह हादसा पुणे जिले के बारामती में टेबलटॉप हवाई पट्टी के किनारे से महज 200 मीटर की दूरी पर हुआ था, जहां मुंबई से उड़ान भरने वाला उनका लीयरजेट 45 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार, हादसे का शिकार हुए वीटी-एसएसके विमान के चालक दल ने बारामती हवाई अड्डे के पास पहुँचने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर से दृश्यता (Visibility) के बारे में जानकारी मांगी थी। टावर ने दृश्यता मार्करों को देखकर 3000 मीटर की दृश्यता होने की जानकारी दी थी। इसके अलावा, लैंडिंग की अनुमति देते समय टावर ने यह भी बताया कि हवा शांत है।
चौंकाने वाली बात यह है कि बारामती में लैंडिंग के समय बताई गई 3000 मीटर की दृश्यता, VFR (विजुअल फ्लाइट रूल्स) उड़ान के लिए आवश्यक न्यूनतम 5000 मीटर (5 किमी) की दृश्यता से काफी कम थी। यह सुरक्षा प्रोटोकॉल की स्पष्ट अनदेखी को दर्शाता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
हादसे के बाद मिले फ्लाइट रिकॉर्डर
जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि विमान के मलबे के पिछले हिस्से में दोनों फ्लाइट रिकॉर्डर – सॉलिड-स्टेट फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (SSFDR) और सॉलिड-स्टेट कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (SSCVR) – अपने मूल स्थान पर सुरक्षित पाए गए हैं। इन दोनों रिकॉर्डरों को मलबे से निकालकर डेटा रिकवरी और आगे के गहन विश्लेषण के लिए अलग रख दिया गया है। इन रिकॉर्डरों का अध्ययन विमानन सुरक्षा पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण होगा।
AAIB की रिपोर्ट में उन सभी हवाई अड्डों के लिए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जहाँ इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसमें नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को सुरक्षित उड़ान संचालन के लिए बुनियादी ढांचे के उन्नयन को सुनिश्चित करने और ऐसे हवाई अड्डों के लाइसेंस की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि DGCA ऐसे हवाई अड्डों पर, विशेषकर बड़ी संख्या में चार्टर्ड उड़ानों (वीआईपी उड़ानों सहित) के संचालन को देखते हुए, बुनियादी मौसम पूर्वानुमान (MET) सुविधाओं के साथ-साथ लैंडिंग सहायता को बढ़ाने के लिए आवश्यक उपाय करे। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
AAIB ने यह भी सिफारिश की है कि सुरक्षित और विनियमित उड़ान संचालन के लिए इन हवाई अड्डों के लाइसेंस की व्यवहार्यता (feasibility) की गहन जांच की जाए। इस तरह की जांच से भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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