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Holika Dahan 2026: शुभ मुहूर्त और पूजन विधि का विस्तृत वर्णन

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Holika Dahan 2026: फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर होलिका दहन का पर्व सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, जिसे पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष, वर्ष 2026 में होलिका दहन के शुभ मुहूर्त को लेकर पटना महावीर मंदिर के प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसका पालन कर भक्तजन पुण्य के भागी बन सकते हैं।

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# Holika Dahan 2026: शुभ मुहूर्त और पूजन विधि का विस्तृत वर्णन

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होली का पर्व हिन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ आरंभ होता है। यह दिन भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद की भक्ति और अग्निदेव की महिमा का साक्षी है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस पवित्र पर्व पर ग्रहों की स्थिति और अन्य कालों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है ताकि पूजन का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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## वर्ष 2026 में होलिका दहन का ज्योतिषीय महत्व

प्रत्येक वर्ष होलिका दहन का शुभ मुहूर्त पंचांग और ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर निर्धारित किया जाता है। पटना महावीर मंदिर के सिद्ध ज्योतिषाचार्य ने इस संबंध में गहन शोध करते हुए बताया है कि शास्त्रों के विधान और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 2 मार्च 2026 की रात में ही होलिका दहन करना सर्वथा उचित रहेगा। उन्होंने ग्रहण काल और विशेष रूप से **भद्रा काल** के दोष को ध्यान में रखते हुए इस तिथि का निर्धारण किया है, जिससे भक्तजन बिना किसी बाधा के यह पुण्य कर्म संपन्न कर सकें। भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है क्योंकि यह अशुभ फल देता है, अतः ज्योतिषाचार्य द्वारा निर्धारित यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण है।

### होलिका दहन की पारंपरिक पूजा विधि

होलिका दहन से पूर्व भक्तगण श्रद्धापूर्वक पूजन करते हैं। इसकी विधि इस प्रकार है:

* होली जलाने से पूर्व, होलिका के समीप साफ-सफाई करें और पूजन सामग्री एकत्रित करें।
* होलिका के चारों ओर कच्चे सूत को तीन या सात बार लपेटें।
* होलिका पर रोली, अक्षत, फूल, गुलाल, मिठाई, धूप, दीप और जल अर्पित करें।
* भगवान नरसिंह की स्तुति करें और प्रह्लाद की रक्षा के लिए उनका आह्वान करें।
* परिवार के सभी सदस्य मिलकर होलिका की परिक्रमा करें और अपनी मनोकामनाएं कहें।
* इसके बाद शुभ मुहूर्त में होलिका को अग्नि प्रदान करें।
* अग्नि प्रज्वलित होने के बाद उसमें गोबर के उपले, अनाज, जौ और नए अन्न की बालियां अर्पित करें।

### होलिका दहन 2026: पावन मुहूर्त का निर्धारण

वर्ष 2026 में होलिका दहन के लिए पटना महावीर मंदिर के ज्योतिषाचार्य ने शास्त्रों और पंचांग के गहन अध्ययन के पश्चात 2 मार्च की रात्रि को सबसे उपयुक्त बताया है। इस निर्णय में ग्रहण की स्थिति और **भद्रा काल** के प्रभाव का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि सभी भक्तगण दोषमुक्त मुहूर्त में होलिका दहन कर सकें और उन्हें पर्व का पूरा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त हो। अतः, भक्तजनों को 2 मार्च 2026 की रात में ही होलिका दहन का यह पवित्र अनुष्ठान संपन्न करना चाहिए।

### होलिका दहन की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक एक अत्यंत अहंकारी राक्षस राजा था, जिसे वरदान प्राप्त था कि उसे कोई भी मनुष्य या पशु, न दिन में न रात में, न घर में न बाहर, न अस्त्र से न शस्त्र से मार सकता है। वह स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सभी उसकी पूजा करें। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से विमुख करने के लिए अनेक प्रयास किए, पर सब व्यर्थ रहे। अंत में, उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया, जिसे वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में बैठ जाए। लेकिन भगवान की कृपा से होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रह्लाद को कोई आंच नहीं आई। तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है।

### होलिका दहन के पावन मंत्र

होलिका दहन के समय इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी होता है:

अहकूटा पिशाचिनी त्वं, यक्ष रक्षिणी भूतघातिनी।
इयं त्वां प्रतिबध्नामि, भद्रायै मंगलदायिनी।।

### निष्कर्ष और उपाय

होलिका दहन का पर्व न केवल अग्नि को समर्पित है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि सत्य और धर्म की राह पर चलने वालों की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। इस दिन आप अग्नि में अपनी बुराइयों और नकारात्मक विचारों का दहन कर एक नई शुरुआत कर सकते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। होलिका दहन के बाद राख को घर में लाना शुभ माना जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस पवित्र पर्व पर भगवान नरसिंह और प्रह्लाद की कथा का स्मरण कर अपने जीवन में सकारात्मकता और धार्मिकता लाएं।

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