back to top
⮜ शहर चुनें
मार्च, 5, 2026
spot_img

भारत पर Iran-Israel War का गहराता असर: आपकी जेब पर पड़ेगी महंगाई की मार?

spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
- Advertisement - Advertisement

Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसकी तपिश वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर भारतीय बाजारों तक भी पहुंच गई है। कच्चे तेल से लेकर सोने-चांदी, खाने के तेल और दैनिक उपभोग की वस्तुओं तक, हर चीज की कमोडिटी कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

- Advertisement -

भारत पर Iran-Israel War का गहराता असर: आपकी जेब पर पड़ेगी महंगाई की मार?

Iran-Israel War का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

Iran-Israel War: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसकी तपिश वैश्विक अर्थव्यवस्था और खासकर भारतीय बाजारों तक भी पहुंच गई है। कच्चे तेल से लेकर सोने-चांदी, खाने के तेल और दैनिक उपभोग की वस्तुओं तक, हर चीज की कमोडिटी कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हुए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं और आवश्यक वस्तुओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

- Advertisement -

युद्ध के इस माहौल में सोने और चांदी की कीमतों में बेतहाशा उछाल देखा गया है। 1 मार्च, 2026 को घरेलू बाजारों में सोना 1.73 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। चांदी की कीमतें भी 2.90 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब जा पहुंची थीं। हालांकि, पिछले चार सत्रों से कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन अस्थिरता बनी हुई है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  पेट्रोल डीजल प्राइस: मध्य-पूर्व के तनाव के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों पर क्यों नहीं पड़ेगा असर?

इसका असर देश की सिरेमिक इंडस्ट्री पर भी दिख रहा है। गुजरात के मोरबी स्थित सिरेमिक उद्योग युद्ध जैसे हालात के कारण गैस की आपूर्ति में बाधाओं से जूझ रहा है और अगले कुछ दिनों में इसके बंद होने की कगार पर है। सिरेमिक उत्पादन में भट्टियों को जलाने और मिट्टी को सुखाने के लिए प्रोपेन या नेचुरल गैस की अत्यधिक आवश्यकता होती है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और लगातार अमेरिकी हमलों के बाद संघर्ष और तेज हो गया है, जिसके चलते ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है। इससे वैश्विक गैस आपूर्ति बाधित हुई है।

खाने पकाने के तेल की कीमतें भी महंगी हुई हैं। भले ही भारत सीधे ईरान से खाद्य तेल का आयात नहीं करता, लेकिन देश अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेल इंडोनेशिया, मलेशिया (पाम ऑयल), अर्जेंटीना, ब्राजील (सोयाबीन ऑयल) और रूस, यूक्रेन (सूरजमुखी तेल) जैसे देशों से मंगाता है। ईरान-इजरायल में तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर पाम और सोया तेल का उपयोग बायो-फ्यूल बनाने में अधिक होने लगता है। इससे बाजार में खाद्य तेल की आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके अतिरिक्त, युद्ध जैसी स्थिति में शिपिंग और कमोडिटी कीमतें बाजार में अस्थिरता बढ़ने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार धीमा हो जाता है, जिससे स्टॉक की कमी हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के चेयरमैन सुधाकर देसाई के अनुसार, ‘अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह के तनाव या उसके बढ़ने का भारत के कच्चे तेल और कुकिंग ऑयल के बाजारों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल और तमाम फॉसिल फ्यूल महंगे होते हैं, जिससे सभी वस्तुओं की लॉजिस्टिक्स कॉस्ट बढ़ जाती है। इसके अलावा, इससे समुद्री जहाजों के बीमा जोखिम भी बढ़ सकते हैं।’ गौरतलब है कि 5 मार्च से कई समुद्री बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र के लिए वॉर रिस्क कवरेज देना बंद कर दिया है। ऐसे में जहाजों के लिए यहां से गुजरना न केवल महंगा, बल्कि जोखिम भरा भी है।

रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/business/

यह भी पढ़ें:  Stock Market: पॉलीकैब इंडिया को आयकर विभाग का बड़ा झटका, शेयरों में गिरावट क्यों?

घरेलू बाजारों पर गहराता प्रभाव

ड्राई फ्रूट्स भी महंगे हुए हैं। युद्ध के इस माहौल में ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले पिस्ता, केसर, अंजीर, खुबानी जैसे सूखे मेवों की आपूर्ति ठप होने की कगार पर है, जिससे इनकी कीमतें भी बढ़ने लगी हैं।

दालें और प्याज की कीमत में भी इजाफा। भारत अरहर, उड़द और मसूर का आयात म्यांमार, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से करता है। हालांकि, होर्मुज की नाकाबंदी के चलते पश्चिम एशिया में फंसे जहाजों और कंटेनरों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे शिपिंग कंपनियों ने ‘वॉर रिस्क सरचार्ज’ लगा दिया है, जिससे दालों को भारत लाने में अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। भारत प्याज का भी एक बड़ा आयातक है। युद्ध की स्थिति में स्टॉक जमा करने की होड़ में प्याज की मांग अचानक बढ़ गई है। आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट के डर से प्याज की कीमतें भी बढ़ी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

भारत में जल्द लॉन्च होंगी नई Upcoming SUVs: क्या होगा खास?

Upcoming SUVs: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में सब-4 मीटर एसयूवी सेगमेंट में लगातार शानदार ग्रोथ...

स्टॉक मार्केट में जबरदस्त उछाल: वैश्विक झटकों के बावजूद बाजार क्यों चढ़ा?

Stock Market: वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय शेयर...

Google Pixel 10 पर बंपर छूट, जानिए क्या है नया दाम और कहां मिल रही है डील

Google Pixel 10: दिग्गज टेक कंपनी गूगल के प्रीमियम स्मार्टफोन Google Pixel 10 की...

रिश्तों की गहराई को दिखाती एक ‘मॉडर्न हम दिल दे चुके सनम’

Movie Review: क्या आज के दौर में भी 'हम दिल दे चुके सनम' जैसी...
error: कॉपी नहीं, शेयर करें