
Himachal Pradesh Rajya Sabha Election: हिमाचल की राजनीति में इस बार राज्यसभा का चुनाव सिर्फ एक सीट का रण नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर उठती बगावत और बदलते समीकरणों की बिसात भी है। शतरंज की चालों सी इस राजनीति में, हर मोहरा अपनी जगह तलाश रहा है और आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है।
Himachal Pradesh Rajya Sabha Election: हिमाचल में राज्यसभा सीट के ‘बिकने’ का आरोप, कांग्रेस में घमासान तेज
कांग्रेस की ओर से हिमाचल की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अनुराग शर्मा के नामांकन के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राजिंदर राणा ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी पर सीट ‘बेचने’ का गंभीर आरोप लगाया है। यह आरोप तब लगे जब पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा जैसे पार्टी के कद्दावर नेताओं को प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी अनुराग शर्मा पर भरोसा जताया।
एक वीडियो संदेश में, राणा ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सुक्खू से सवाल किया, “मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूं कि राज्यसभा सीट कितने में बेची गई और क्या यह सौदा दुबई में तय हुआ था?” राणा उन पूर्व कांग्रेस नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने 2024 के राज्यसभा चुनावों में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये तीखे आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब राज्य में आगामी 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने हैं।
Himachal Pradesh Rajya Sabha Election: सवालों के घेरे में सीट का ‘सौदा’!
राणा के इस बयान से कुछ दिन पहले, चार बार के राज्यसभा सदस्य आनंद शर्मा ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि “आत्मसम्मान बहुत महंगा होता है” और आज के दौर में सच बोलना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा हो गया है। आनंद शर्मा, जो राज्यसभा चुनाव के लिए प्रमुख दावेदारों में से एक थे, ने कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी नहीं थी और यह “आलाकमान ने अपने विवेक से लिया।” यह घटनाक्रम निश्चित रूप से पार्टी के भीतर कांग्रेस में कलह को उजागर करता है।
राणा ने आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “महिलाओं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं, विधायकों, मंत्रियों और ठेकेदारों सहित समाज के सभी वर्ग पहले से ही चिंतित थे, लेकिन अब अपना जीवन पार्टी को समर्पित करने वाले वरिष्ठ नेता भी अपमानित और असहज महसूस कर रहे हैं।” यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
आनंद शर्मा की चुप्पी और राणा के तीखे बोल
कांग्रेस आलाकमान के फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया, खासकर तब जब आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता की उम्मीदवारी की अटकलें थीं। शर्मा की ‘आत्मसम्मान’ वाली टिप्पणी ने भी इस फैसले के बाद पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को और हवा दी। एक तरफ आनंद शर्मा जैसे अनुभवी नेता हैं, जो सीधे तौर पर भले ही कुछ न कह रहे हों, लेकिन उनकी बातों में एक गहरी निराशा झलक रही है। वहीं दूसरी ओर राजिंदर राणा जैसे पूर्व कांग्रेसी नेता हैं, जो मुखर होकर आरोप लगा रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अनुराग शर्मा की जीत लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि किसी अन्य दल ने इस एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है। हालांकि, यह जीत पार्टी के भीतर उठे सवालों और आरोपों के साये में होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस पूरी घटना ने न केवल हिमाचल की राजनीति में गर्मी ला दी है, बल्कि कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती भी खड़ी कर दी है।
कांग्रेस में बढ़ता असंतोष और भविष्य की राह
राणा के आरोपों और आनंद शर्मा की टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। विधायकों, मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के बीच व्याप्त असंतोष एक गंभीर विषय है। पार्टी आलाकमान को इस आंतरिक कलह को शांत करने और सभी वर्गों को एक साथ लाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अगर इस असंतोष को समय रहते संबोधित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह पार्टी के लिए और भी बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के लिए एक कठिन परीक्षा मान रहे हैं, जहाँ उसे न केवल बाहरी चुनौतियों से निपटना है, बल्कि अपने ही घर को भी एकजुट रखना है।



