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श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में फिर से MBBS Course शुरू करने की तैयारी, छात्रों के लिए नई उम्मीद

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MBBS Course: श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज ने एक बार फिर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस कोर्स शुरू करने की अनुमति मांगी है, जिससे मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक छात्रों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। संस्थान के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है और लगभग 10 लाख रुपये की निरीक्षण शुल्क भी जमा कर दी है, अब उन्हें आगामी महीनों में एनएमसी टीम के निरीक्षण और उसके सकारात्मक परिणाम की प्रतीक्षा है।

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श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में फिर से MBBS Course शुरू करने की तैयारी, छात्रों के लिए नई उम्मीद

श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में MBBS Course की चुनौतियां और वापसी का प्रयास

MBBS Course: श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस कोर्स शुरू करने की अनुमति मांगते हुए दोबारा आवेदन किया है। यह कदम संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, खासकर तब जब पिछले दिनों एनएमसी ने कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति वापस ले ली थी। संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह आवेदन किया गया है, जिसके लिए निरीक्षण और अन्य प्रक्रियाओं के लिए लगभग 10 लाख रुपये की फीस भी जमा की गई है। संस्थान अब उम्मीद कर रहा है कि आने वाले महीनों में NMC की टीम निरीक्षण के बाद इस पर सकारात्मक फैसला लेगी।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल 7 जनवरी को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने इस मेडिकल संस्थान में एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली थी। इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद, कॉलेज प्रशासन ने वहां पढ़ रहे छात्रों को घर लौटने के लिए कह दिया था। यह निर्णय छात्रों और उनके परिवारों के लिए चिंता का एक बड़ा कारण बन गया था, क्योंकि उन्हें अचानक कॉलेज छोड़ने और अपनी पढ़ाई को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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कॉलेज के पहले बैच में कुल 50 छात्रों को दाखिला मिला था। जब अनुमति रद्द हुई, तो इन छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए उन्हें जम्मू-कश्मीर के सात नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित कर दिया गया। इनमें से 22 छात्रों को कश्मीर घाटी के तीन मेडिकल कॉलेजों में और बाकी छात्रों को जम्मू क्षेत्र के चार कॉलेजों में समायोजित किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि छात्रों को अपनी मेडिकल शिक्षा जारी रखने का अवसर मिले।

अनुमति रद्द होने का यह मामला उस समय काफी विवादों में भी रहा था। श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति नामक कुछ संगठनों के समूह ने कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। समिति का तर्क था कि यह संस्थान माता वैष्णो देवी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के दान से बनाया गया है, इसलिए यहां पढ़ने वाले छात्रों के लिए कुछ शर्तें होनी चाहिए। विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह बात भी सामने आई कि कॉलेज के पहले बैच में शामिल 50 छात्रों में से 44 छात्र मुस्लिम समुदाय से थे। हालांकि, कई छात्रों का कहना था कि NMC के फैसले का संबंध इन विरोध प्रदर्शनों से जोड़ा जा रहा था, जबकि वास्तविक कारण कुछ और थे।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने जब कॉलेज की अनुमति वापस ली थी, तब उसने अपने आदेश में संस्थान में कुछ महत्वपूर्ण कमियों का जिक्र किया था। इन कमियों में मुख्य रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, शिक्षकों की अपर्याप्त संख्या और अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता जैसे मुद्दे शामिल बताए गए थे। संस्थान के अधिकारियों ने उस समय इन आरोपों को पूरी तरह सही नहीं माना था, उनका कहना था कि कॉलेज में पर्याप्त सुविधाएं मौजूद हैं और उन्हें लगातार बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। NMC Guidelines का पालन करना सभी मेडिकल कॉलेजों के लिए अनिवार्य है, और इन्हीं दिशानिर्देशों के तहत संस्थान का मूल्यांकन किया जाता है।

भविष्य की तैयारी और मजबूत होती सुविधाएं

अब संस्थान के अधिकारी आगामी निरीक्षण के लिए पहले से अधिक तैयारियां कर रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कमी न रहे। इस दिशा में, नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल को भी इस मेडिकल संस्थान से जोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अस्पताल के प्रबंधन को संस्थान के अधीन लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 1 अप्रैल से इस अस्पताल के सभी डॉक्टर और कर्मचारी मेडिकल इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर काम करेंगे। इस एकीकरण से अस्पताल में मरीजों की संख्या और चिकित्सा सुविधाएं दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जो कि एनएमसी की अनुमोदन प्रक्रिया के लिए एक सकारात्मक कदम साबित होगा। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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