
Bhagalpur Mid-Day Meal Crisis: चूल्हा भले ही मिट्टी का हो या गैस का, जब तक जलता है, घर में रौनक रहती है। लेकिन भागलपुर में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए जलने वाले चूल्हों पर अब ‘गैस संकट’ का काला साया मंडरा रहा है, जिससे दो लाख से अधिक मासूमों के पेट भरने की योजना डांवाडोल हो गई है।
Bhagalpur Mid-Day Meal Crisis: गैस की किल्लत से चरमरा रही योजना
भागलपुर जिले के 1254 प्रारंभिक विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) पर इन दिनों गहरा संकट छा गया है। दो लाख से अधिक बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने वाली यह महत्वपूर्ण योजना, अब एलपीजी सिलेंडर की कमी के कारण खतरे में पड़ गई है। यह सिर्फ भोजन का सवाल नहीं, बल्कि इन बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। बिहार के ग्रामीण अंचलों में यह भोजन योजना शिक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा का भी एक अहम जरिया है।
यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब यह पता चलता है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। पिछले कुछ समय से गैस वितरक एजेंसियों और विद्यालयों के बीच तालमेल की कमी स्पष्ट दिख रही है, जिसका खामियाजा सीधे-सीधे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आखिर कहां से आया यह संकट?
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसियों द्वारा विद्यालयों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। कई विद्यालयों में तो एक-एक सप्ताह तक सिलेंडर की आपूर्ति ठप रहती है, जिसके चलते मिड-डे मील बनाना मुश्किल हो गया है। मजबूरन, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन को लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है, जो न केवल प्रदूषणकारी है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी खतरनाक है। यह स्थिति बिहार के दूरदराज के इलाकों में छात्रों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने इस संबंध में कई बार गैस एजेंसियों को पत्र लिखा है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी, ताकि इस संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
लाखों बच्चों के पोषण पर सीधा असर
इस योजना के तहत भोजन प्राप्त करने वाले अधिकांश बच्चे गरीब और वंचित परिवारों से आते हैं, जिनके लिए स्कूल में मिलने वाला यह भोजन एक महत्वपूर्ण पोषण स्रोत होता है। गैस की कमी के कारण भोजन की गुणवत्ता और नियमितता दोनों प्रभावित हो रही हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह केवल भागलपुर की कहानी नहीं है, बिहार के कई जिलों में इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- प्रभावित बच्चों की संख्या: 2 लाख से अधिक
- प्रभावित विद्यालय: 1254
- मुख्य समस्या: एलपीजी सिलेंडर की कमी
- आपातकालीन उपाय: लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग
- दीर्घकालिक चिंता: बच्चों के पोषण और शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव
इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द समाधान आवश्यक है, ताकि हमारे भविष्य के कर्णधारों को उनके हक का पौष्टिक भोजन मिलता रहे और वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। यह सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।




