
LPG Gas Supply: दरभंगा में एलपीजी गैस की किल्लत ने लोगों के चूल्हे की आग ठंडी कर दी है, जिससे आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जिला प्रशासन के कानों तक जब शिकायतों का अंबार पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। एक ही दिन में जिला नियंत्रण कक्ष को 54 शिकायतें मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि समस्या गंभीर है और तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
LPG Gas Supply संकट: इन इलाकों से आईं सबसे ज्यादा शिकायतें
जिलाधिकारी, दरभंगा के आदेश पर स्थापित नियंत्रण कक्ष में शुक्रवार, 13 मार्च 2026 को शिकायतों की झड़ी लग गई। गैस आपूर्ति में हो रही भारी कठिनाई को लेकर लोगों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल 54 शिकायतों में से अधिकांश दरभंगा सदर और बहादुरपुर प्रखंड से थीं, जो यह दर्शाता है कि शहरी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नियंत्रण कक्ष द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार शिकायतों का प्रखंड-वार विवरण इस प्रकार है:
- दरभंगा सदर: 23 शिकायतें
- बहादुरपुर: 19 शिकायतें
- बिरौल: 07 शिकायतें
- सिंहवाड़ा: 02 शिकायतें
- तारडीह: 02 शिकायतें
- घनश्यामपुर, मनीगाछी, बेनीपुर, जाले, हनुमाननगर और हायाघाट: प्रत्येक से 01 शिकायत
यह आंकड़े बताते हैं कि रसोई गैस का संकट लगभग पूरे जिले में फैल चुका है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशासन का आश्वासन, जल्द सुधरेगी स्थिति
शिकायतों का अंबार लगने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। नियंत्रण कक्ष में तैनात कर्मियों ने तुरंत सभी शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए संबंधित मार्केटिंग अफसरों (MO) को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एलपीजी गैस की आपूर्ति को तत्काल सुचारु किया जाए, ताकि आम उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा को समाप्त किया जा सके। प्रशासन ने यह भी कहा कि… आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। …जमाखोरी या कालाबाजारी करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।
जिला आपदा प्रबंधन शाखा द्वारा संचालित इस नियंत्रण कक्ष का दूरभाष संख्या 06272-245055 है, जिस पर नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन ने वादा किया है कि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है और लोगों को कब तक इस समस्या से निजात मिलती है।




