
Delhi News: LPG Supply India: मध्य पूर्व की तपती रेत में सुलगती आग अब भारत की रसोई तक पहुँचने लगी है। युद्ध के गहरे साये में अचानक बढ़ी गैस सिलेंडर की बुकिंग ने उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ा दी हैं, लेकिन सरकार स्थिति को संभालने का दावा कर रही है।
मध्य पूर्व युद्ध का असर: भारत में LPG Supply India की बढ़ी मांग, सरकार ने किया बड़ा दावा
LPG Supply India: घबराहट में बढ़ी बुकिंग, सरकार का आश्वासन
मध्य पूर्व में छिड़े युद्ध का असर अब भारत के घरेलू मोर्चे पर भी दिखने लगा है। देश में रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडरों की मांग में अचानक आई तेज़ी ने उपभोक्ताओं को चिंतित कर दिया है। लोग सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक सिलेंडर बुक करा रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति केवल घबराहट के कारण पैदा हुई है और वास्तविक कमी की कोई बात नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले देश में रोजाना औसतन लगभग 55 लाख गैस सिलेंडरों की बुकिंग होती थी। यह आंकड़ा हाल के दिनों में बढ़कर 75 लाख प्रतिदिन से अधिक हो गया है। सुजाता शर्मा ने बताया कि यह वृद्धि मुख्य रूप से लोगों द्वारा घबराहट में की जा रही अतिरिक्त gas cylinder booking को दर्शाती है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से सिलेंडर बुक करने से बचें। उनके मुताबिक, सरकार देश में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/ सरकार की इन कोशिशों में घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वितरण व्यवस्था की निगरानी करना शामिल है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और आपूर्ति श्रृंखला पर असर
सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए घरेलू स्तर पर रसोई गैस के उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि की है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश में उत्पादित होने वाली संपूर्ण गैस फिलहाल केवल घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध हो, ताकि आपूर्ति में कोई बाधा न आए। भारत अपनी रसोई गैस की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता रहा है। पूर्व में, देश की लगभग 60 प्रतिशत मांग आयात के माध्यम से पूरी की जाती थी, जिसमें से 90 प्रतिशत आपूर्ति फारस की खाड़ी से होकर गुजरने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, हाल ही में क्षेत्र में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग काफी प्रभावित हुआ है। यह संकरा जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल व गैस परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। युद्ध की शुरुआत के बाद कई टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था पर भारी दबाव डाला है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, गैस की उपलब्धता और उसकी वितरण व्यवस्था की गहन निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है। यह समिति स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि कच्चे तेल को लेकर फिलहाल किसी बड़ी चिंता की कोई वजह नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, भारत अब लगभग 40 विभिन्न देशों से कच्चा तेल आयात करता है और देश में आने वाली आपूर्ति दैनिक आवश्यकता से अधिक बताई जा रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, ईरान ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि उसने भारत के झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। ईरान की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर निश्चित रूप से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि, वर्तमान में सरकार का दावा है कि देश में रसोई गैस और समग्र ऊर्जा आपूर्ति को लेकर घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है।

