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पंचक 2026: जानिए कब से शुरू हो रहा है यह काल और क्यों है अशुभ?

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Panchak 2026: सनातन धर्म में प्रत्येक कालखंड का अपना विशेष महत्व होता है। कुछ अवधियां अत्यंत शुभ मानी जाती हैं, तो कुछ में विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है। मार्च 2026 में आ रहा पंचक काल भी ऐसी ही एक अवधि है, जिसके विषय में जानना अत्यंत आवश्यक है।

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पंचक 2026: जानिए कब से शुरू हो रहा है यह काल और क्यों है अशुभ?

ज्योतिषाचार्य आचार्य विनोद त्रिपाठी के अनुसार, हिन्दू धर्म में पंचक को एक अत्यंत अशुभ अवधि माना गया है। यह लगभग पांच दिनों तक चलता है और इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को वर्जित बताया गया है। आइए समझते हैं कि इस काल को अशुभ क्यों माना जाता है और हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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पंचक 2026: क्या है यह अशुभ काल और इसकी ज्योतिषीय महत्ता?

पंचक की अवधि में कुछ विशेष कार्य वर्जित माने गए हैं, ताकि व्यक्ति किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा से बचा रह सके। हिन्दू पंचांग के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती इन पांच नक्षत्रों में गोचर करता है, तो इस अवधि को पंचक कहा जाता है। यह पांच नक्षत्रों का समूह ही पंचक कहलाता है। इन नक्षत्रों के संयोग से बनने वाली यह अवधि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विशेषकर मृत्यु होने पर पंचक शांति करवाना अनिवार्य माना गया है ताकि परिवार में अन्य कोई अशुभ घटना न घटे।

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पंचक का आरंभ और इसकी अवधि

जैसा कि ज्योतिषाचार्य आचार्य विनोद त्रिपाठी ने बताया है, पंचक का आरंभ 16 मार्च 2026 से हो रहा है। यह अवधि लगभग पांच दिनों तक चलेगी। इस दौरान व्यक्ति को अपने व्यवहार और कार्यों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

पंचक में वर्जित कार्य और उनके पीछे का कारण

आचार्य विनोद त्रिपाठी के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ कार्य जैसे लकड़ी एकत्र करना, घर की छत डलवाना, पलंग बनवाना, दक्षिण दिशा की यात्रा करना और दाह संस्कार करना अशुभ माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक काल में होती है, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उसके परिवार में पांच अन्य सदस्यों पर भी संकट आने की आशंका रहती है। इस स्थिति से बचने के लिए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, मृतक के साथ आटे के पांच पुतले बनाकर उनका अंतिम संस्कार करने की परंपरा है, जिसे पंचक शांति कहा जाता है। यह उपाय नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक माना जाता है।

उपाय और सावधानियां

पंचक की अवधि में धैर्य और संयम बनाए रखना चाहिए। अनावश्यक विवादों से बचें और कोई भी महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें। इस समय दान-पुण्य करना और प्रभु का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है। किसी भी नए और बड़े कार्य को इस दौरान टाल देना उचित माना जाता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

यह जानकारी सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। विस्तृत जानकारी के लिए किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से संपर्क करें।

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