
कांग्रेस ने आगामी असम विधानसभा चुनावों के लिए अपने 23 उम्मीदवारों की दूसरी सूची शनिवार (14 मार्च) को जारी कर दी है। इसी के साथ, पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगियों के लिए 15 सीटें छोड़ी हैं। इस ताजा घोषणा के बाद, 126 सदस्यीय असम विधानसभा के लिए अब तक कांग्रेस कुल 65 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। आपको बता दें कि इस पूर्वोत्तर राज्य में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने हैं।
कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी की गई इस सूची में प्रमुख नामों में श्रीजंग्राम से नूरुल इस्लाम, मांडिया से अब्दुल खालेक, चमारिया से रकीबुद्दीन अहमद, तिनसुकिया से डेविड फुकन और तिनखोंग से बिपुल गोगोई शामिल हैं। ये सभी कद्दावर नेता अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज करने की पूरी कोशिश करेंगे, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
असम इलेक्शन: कांग्रेस की दूसरी सूची और सियासी दांव
पार्टी ने 3 मार्च को असम विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पहली सूची में 42 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। उस समय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से मैदान में उतारा गया था। चुनावों की औपचारिक घोषणा से पहले ही अपने उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक करके कांग्रेस ने एक तरह का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। पार्टी के दिग्गज नेता और असम कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया नाज़िरा सीट से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष रिपुन बोरा को बरछल्ला सीट से टिकट दिया गया है। इन कांग्रेस कैंडिडेट्स पर पार्टी को काफी भरोसा है।
असम में कांग्रेस के दिग्गज और उनकी साख:
- गौरव गोगोई (प्रदेश अध्यक्ष): जोरहाट सीट से।
- देबब्रत सैकिया (सीएलपी नेता): अपनी परंपरागत नाज़िरा सीट से।
- रिपुन बोरा (पूर्व पीसीसी अध्यक्ष): बरछल्ला सीट से।
इन सभी नेताओं की प्रतिष्ठा इन चुनावों में दांव पर लगी है।
रणनीतिक विश्लेषण: महागठबंधन और क्षेत्रीय समीकरण
कांग्रेस ने असम में बीजेपी विरोधी मतों के बिखराव को रोकने के लिए ‘महागठबंधन’ मॉडल को प्राथमिकता दी है। 15 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़कर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय दलों को उचित सम्मान देने और उन्हें साथ लेकर चलने के पक्ष में है। यह रणनीति अप्रैल में होने वाले चुनावों में सत्ता विरोधी लहर को भुनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य बीजेपी के विजय रथ को रोकना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चुनौतीपूर्ण चुनावी परिदृश्य
असम का चुनावी परिदृश्य हमेशा से ही चुनौतीपूर्ण रहा है, जहाँ जातीय और भाषाई समीकरणों का गहरा प्रभाव होता है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव केवल सीटें जीतने का नहीं, बल्कि राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करने का भी एक मौका है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति कितनी सफल होती है और क्या वह असम में एक मजबूत सरकार बनाने में कामयाब हो पाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


