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मार्च, 22, 2026
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Rajya Sabha Election: बिहार में सियासी हलचल तेज, कांग्रेस-RJD के 3 विधायक नदारद, मंत्री अशोक चौधरी का बड़ा दावा

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Rajya Sabha Election: बिहार की सियासत में आजकल विधायकों की वफादारी एक पहेली बन गई है, जहां सियासी शतरंज की बिसात पर हर चाल मायने रखती है।

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Rajya Sabha Election: बिहार में सियासी हलचल तेज, कांग्रेस-RJD के 3 विधायक नदारद, मंत्री अशोक चौधरी का बड़ा दावा

Rajya Sabha Election: अनुपस्थित विधायकों पर गर्मायी सियासत

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के दौरान कांग्रेस के दो और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के एक विधायक की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में राजनीतिक गहमागहमी को बढ़ा दिया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर ऐसे समय में जब हर एक वोट का महत्व होता है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन विधायकों की गैरमौजूदगी ने सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे दोनों में चिंताएं बढ़ा दी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्य के वरिष्ठ मंत्री अशोक चौधरी ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने जोर देकर कहा, “यहां विचारों की पॉलिटिक्स होती है। प्रेशर पॉलिटिक्स बिहार में कभी भी सक्सेसफुल नहीं हो सकती है।” मंत्री चौधरी के इस बयान को उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिनमें विधायकों पर किसी तरह के दबाव की बात कही जा रही थी। हालांकि, विपक्ष इस मसले को लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है।

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लापता विधायकों की तलाश और सियासी समीकरण

कांग्रेस और आरजेडी दोनों ही दलों के नेता अब अपने अनुपस्थित विधायकों से संपर्क साधने और उनकी गैरमौजूदगी का कारण जानने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी कई समीकरणों को जन्म दिया है, जहां विधायकों की एकजुटता किसी भी दल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इसे सामान्य घटना बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे सरकार की अंदरूनी कलह का नतीजा बता रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

राज्यसभा चुनाव में विधायकों की अनुपस्थिति अक्सर बड़े राजनीतिक संदेश देती है। इस बार भी यह माना जा रहा है कि इन तीन विधायकों की गैरमौजूदगी मात्र संयोग नहीं, बल्कि किसी गहरी राजनीतिक गहमागहमी का परिणाम हो सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राजनीतिक विश्लेषक इसे दलों के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष से भी जोड़कर देख रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह मामला क्या नया मोड़ लेता है और संबंधित दल अपने इन विधायकों को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

मंत्री अशोक चौधरी ने अपने बयान में बिहार की राजनीति के चरित्र पर प्रकाश डाला, जहां उनका मानना है कि विचारधाराओं का संघर्ष होता है, न कि दबाव की राजनीति का। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में दबाव की राजनीति कभी सफल नहीं हो सकती है, जो परोक्ष रूप से उन लोगों के लिए एक संदेश हो सकता है जो ऐसी रणनीतियों का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है, क्योंकि पार्टियां अपने रुख और आगे की रणनीति तय करेंगी।

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