
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर, आइए जानते हैं इस वर्ष माँ दुर्गा के आगमन की विशेषता और नववर्ष के शुभारंभ की मंगलमय बेला।
Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा की सवारी, घटस्थापना और हिंदू नववर्ष का शुभ आगमन
चैत्र नवरात्रि 2026: जानें घटस्थापना का पावन पर्व
पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ होता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ होता है। वर्ष 2026 में, 19 मार्च, गुरुवार से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष 2083 का भव्य आगाज हो रहा है। यह नौ दिनों का पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित है, जिसमें साधक विशेष पूजा-अर्चना कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जिस दिन नवरात्रि की शुरुआत होती है, उसी वार के आधार पर माँ दुर्गा की सवारी तय की जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चूंकि इस वर्ष नवरात्रि का आरंभ गुरुवार को हो रहा है, तो देवी माँ नाव (नौका) पर सवार होकर आएंगी। नाव पर माँ का आगमन अत्यंत शुभ माना जाता है, जो सुख-समृद्धि और उन्नति का प्रतीक है। यह समय आध्यात्मिक उत्थान और संकल्पों को सिद्ध करने के लिए अत्यंत अनुकूल होता है। इस पवित्र काल में, भक्तगण उपवास रखकर, मंत्र जाप कर और दुर्गा सप्तशती का पाठ कर देवी की कृपा प्राप्त करते हैं।
घटस्थापना की विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- चावल का ढेर बनाकर उसके ऊपर मिट्टी का एक चौड़े मुँह वाला कलश स्थापित करें।
- कलश में जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत, लौंग का जोड़ा, दूर्वा घास और हल्दी की गांठ डालें।
- कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाकर नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर उस पर रखें।
- नारियल को कलावा से बांधें और उस पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
- इसके बाद कलश के चारों ओर मिट्टी बिछाकर उसमें जौ बो दें। यह नौ दिनों में अंकुरित होते हैं, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- देवी दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उनका आह्वान करें।
घटस्थापना के पावन क्षण
| विवरण | समय (19 मार्च 2026) |
|---|---|
| चैत्र प्रतिपदा तिथि प्रारंभ | 18 मार्च 2026, रात 09:27 बजे |
| चैत्र प्रतिपदा तिथि समाप्त | 19 मार्च 2026, शाम 06:17 बजे |
| घटस्थापना के मंगलमय बेला | सुबह 06:29 बजे से 07:38 बजे तक |
| अभिजीत मुहूर्त | सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक |
इस शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है और माँ दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है। इस वर्ष घटस्थापना का शुभ मुहूर्त अत्यंत पावन है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नवरात्रि का महत्व और फल
चैत्र नवरात्रि का प्रत्येक दिन एक विशिष्ट देवी स्वरूप को समर्पित है, जिनके पूजन से अलग-अलग मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि यह प्रकृति के नए चक्र के आरंभ का भी प्रतीक है। इस दौरान किए गए दान, तप और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। यह अवधि नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश कर सकारात्मकता का संचार करती है। इस दौरान, ग्रह गोचर का प्रभाव भी सभी राशियों पर अलग-अलग रूप से पड़ता है, जिससे जीवन में सकारात्मक या नकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
माँ दुर्गा का महामंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
उपसंहार और उपाय
चैत्र नवरात्रि का यह पावन पर्व हमें आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का सुअवसर प्रदान करता है। इस दौरान शुद्ध मन से की गई आराधना और नवग्रहों की शांति के उपाय अत्यंत फलदायी होते हैं। माँ दुर्गा की कृपा से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। नवरात्रि के नौ दिनों तक माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करें और अपनी श्रद्धा अनुसार कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन करें। यह आपको पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस तरह आप इस पवित्र अवधि का सदुपयोग कर सकते हैं और माँ जगदम्बा का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।



