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मार्च, 19, 2026
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चेटीचंड 2026: सिंधी नववर्ष और भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव

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Cheti Chand 2026

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Cheti Chand 2026: हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को चेटीचंड का पावन पर्व बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन सिंधी समुदाय के लिए एक नई शुरुआत, समृद्धि और खुशियों का संदेश लेकर आता है।

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चेटीचंड 2026: सिंधी नववर्ष और भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव

चेटीचंड 2026: पर्व की महिमा और महत्व

चेटीचंड 2026 का यह शुभ पर्व 20 मार्च को मनाया जाएगा, जो कि भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। यह पर्व सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि सिंधी संस्कृति और आस्था का एक जीवंत प्रतीक है। यह दिन सिंधी समुदाय के लिए सिंधी नववर्ष का आरंभ होता है, जब वे एक-दूसरे को ‘नूतन वर्ष जो नवाणु’ कहकर शुभकामनाएं देते हैं। भगवान झूलेलाल, जिन्हें जल और ज्योति के देवता वरुण देव का अवतार माना जाता है, ने अत्याचारों से सिंधी समाज की रक्षा की थी। इस दिन भक्तजन उनकी पूजा-अर्चना कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चेटीचंड का पर्व एकता और भाईचारे का संदेश देता है, जहाँ हर सिंधी परिवार खुशी और उत्साह से इस दिन को मनाता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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चेटीचंड 2026: तिथि और शुभ संयोग

चेटीचंड का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, यह शुभ तिथि 20 मार्च को पड़ रही है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति और नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान झूलेलाल से अपने जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सुख-समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।

भगवान झूलेलाल और बहाना साहिब की पूजा विधि

चेटीचंड के दिन भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना विशेष विधि-विधान से की जाती है। इस पर्व का मुख्य आकर्षण ‘बहाना साहिब’ का अनुष्ठान होता है।

  • प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • एक कलश में जल भरकर उस पर नारियल रखें और लाल वस्त्र लपेटें।
  • कलश के पास आटे का दीपक (जिसमें घी का प्रयोग हो), मिश्री, फल, इलायची और अन्य मौसमी प्रसाद रखें।
  • भगवान झूलेलाल की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और उनका श्रद्धापूर्वक पूजन करें।
  • सायंकाल में ‘बहाना साहिब’ को नदी या तालाब के किनारे ले जाकर जल में प्रवाहित करें।
  • भगवान झूलेलाल की आरती करें और उनसे सुख-शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करें।
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चेटीचंड पर्व का सांस्कृतिक महत्व

चेटीचंड केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह सिंधी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। यह पर्व सिंधी समाज में एकता, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है। इस दिन सिंधी लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, बधाइयाँ देते हैं और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। यह पर्व हमें धर्म, न्याय और एकता के मूल्यों की याद दिलाता है और सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।

झूलेलाल मंत्र और उसका प्रभाव

भगवान झूलेलाल की आराधना के लिए कई मंत्रों का जाप किया जाता है। इन मंत्रों के जाप से मन को शांति मिलती है और कष्टों का निवारण होता है।

ॐ श्री वरुणाय नमः।

अहो लाल! मूंजा झूलेलाल!

इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से भगवान झूलेलाल की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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उपसंहार और उपाय

चेटीचंड का यह पावन पर्व न केवल भगवान झूलेलाल के अवतरण का उत्सव है, बल्कि यह सिंधी समुदाय की अटूट आस्था, सहिष्णुता और सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना और प्रार्थनाएं जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की राह पर चलने वालों की रक्षा स्वयं ईश्वर करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अवसर पर गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना, उन्हें भोजन कराना एक उत्तम उपाय माना जाता है, जिससे भगवान झूलेलाल प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

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