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मार्च, 19, 2026
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Bihar agriculture की रफ्तार पर लगा ब्रेक? वैज्ञानिकों की मेहनत पर बाजार की बेरुखी पड़ रही भारी!

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Bihar agriculture: बिहार में खेती-किसानी के नवाचार का इंजन तो फर्राटे भर रहा है, लेकिन बाजार का पहिया उम्मीदों की कीचड़ में फंसा नजर आ रहा है।

कृषि प्रधान राज्य बिहार में खेती को लेकर लगातार नए प्रयोग और तकनीकी विकास तो हो रहे हैं, लेकिन इन उपलब्धियों का वास्तविक लाभ किसानों की जेब तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह कृषि उत्पादों के लिए एक मजबूत और सुलभ बाजार व्यवस्था का न होना है। भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने इस गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब तक उपज को सही बाजार नहीं मिलेगा, तब तक कृषि विकास की गति धीमी ही रहेगी।

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डॉ. सिंह के अनुसार, कृषि वैज्ञानिकों का मुख्य कार्य नई किस्मों और तकनीकों पर शोध करना है, और इस मोर्चे पर बीएयू ने अभूतपूर्व काम किया है। विश्वविद्यालय ने कई नई फसलें, तकनीकें और उत्पाद विकसित किए हैं, जिनमें से कई को पेटेंट भी मिल चुका है। लेकिन विडंबना यह है कि जब इन नई तकनीकों का उपयोग कर किसान बंपर उत्पादन करते हैं, तो उन्हें बाजार में अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह स्थिति किसानों के मनोबल को कमजोर करती है।

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Bihar agriculture में बाजार लिंक की कमी बनी बड़ी चुनौती

कुलपति ने बताया कि किसान अक्सर उनसे यह सवाल करते हैं कि जब पैदावार अच्छी हुई है, तो बाजार में सही दाम क्यों नहीं मिल रहे हैं। यह एक गंभीर समस्या है जो सीधे तौर पर किसानों के उत्साह को प्रभावित करती है और कृषि विकास की पूरी प्रक्रिया को बाधित कर देती है। हाल ही में भागलपुर में आयोजित हुए एक राष्ट्रीय कृषि मेले के दौरान, डॉ. सिंह ने यह मुद्दा बिहार के कृषि मंत्री के समक्ष भी उठाया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीज से लेकर बाजार तक की संपूर्ण श्रृंखला में सरकार, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय की तत्काल आवश्यकता है।

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उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य में छोटे-छोटे कृषि आधारित उद्योग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिन्हें कुटीर और सामुदायिक स्तर पर आसानी से संचालित किया जा सके। इससे न केवल किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

वैल्यू एडिशन और कृषि रोडमैप से बदलेगी तस्वीर

डॉ. सिंह ने बिहार सरकार के महत्वाकांक्षी कृषि रोडमैप का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित है। उन्होंने आग्रह किया कि इस राशि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर खर्च किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका मानना है कि जब तक उपज को सीधे बाजार से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य अधूरा रहेगा।

कुलपति के अनुसार, बिहार में मक्का, मखाना, फल और सब्जियों जैसे कई कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन की अपार संभावनाएं हैं। उदाहरण के लिए, टमाटर से सॉस और चिप्स बनाना या फलों से जैम और जूस तैयार करना। इस तरह के छोटे कृषि आधारित उद्योग लगाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। यह कदम बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, बशर्ते इसे सही नीति और समन्वय के साथ लागू किया जाए।

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