
Fake Medical Report: न्याय की चौखट पर फर्जीवाड़े की गहरी नींव खोदने वालों का तिलिस्म टूट ही गया। जब बात जान पर बन आए और सबूतों से खिलवाड़ हो, तो सच्चाई अपनी राह ढूंढ ही लेती है। दरभंगा में एक ऐसे ही शातिर जालसाज की गिरफ्तारी ने मेडिकल फ्रॉड के गठजोड़ को उजागर कर दिया है।
कैसे हुआ ‘फर्जी मेडिकल रिपोर्ट’ का खेल?
दरभंगा पुलिस ने एक ऐसे ही मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाने की साजिश में शामिल एक स्कैनिंग सेंटर के मालिक को दबोच लिया है।बिरौल पुलिस ने फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाने की साजिश में स्कैनिंग सेंटर मालिक लक्ष्मण झा उर्फ नटवर को बेनीपुर से गिरफ्तार किया। उस पर 2022 के एक मारपीट मामले में फर्जी रिपोर्ट और धारा 307 लगवाने का आरोप है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब मेडिकल के क्षेत्र में फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस को लंबे समय से चकमा दे रहा यह शातिर लक्ष्मण झा उर्फ नटवर आखिरकार बेनीपुर से गुप्त सूचना पर गिरफ्तार कर लिया गया।
लक्ष्मण झा बेनीपुर में # सिटी स्कैनिंग सेंटर और # स्कैनिंग सेंटर नाम से दो अलग-अलग प्रतिष्ठान चलाता है। इसके अतिरिक्त, बिरौल, अलीनगर, बहेड़ी और घनश्यामपुर जैसे विभिन्न स्थानों पर भी उसके कई स्कैनिंग सेंटर अलग-अलग नामों से संचालित होते हैं। यह गिरफ्तारी एक बड़े रैकेट के खुलासे की तरफ इशारा करती है।
इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ में 17 जुलाई 2022 को बिरौल थाना क्षेत्र के बरेडीह गांव में सड़क निर्माण को लेकर बिजली देवी और ठक्कन झा के परिवार के बीच हुई एक खूनी झड़प थी। इस मारपीट में ठक्कन झा के बेटे धीरज को गंभीर चोटें आईं और उसे बिरौल से डीएमसीएच रेफर किया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
धीरज के परिवार ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने इसमें हल्की धाराएं लगाईं। इसी बीच, आरोपी पक्ष की बिजली देवी को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया और डीएमसीएच से एक फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर उसके बयान पर दर्ज प्राथमिकी को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) में बदलवा दिया गया। इस घटना ने पूरे न्याय प्रणाली को चुनौती दी।
सच्चाई उजागर हुई, अब होगी कठोर कार्रवाई
पीड़ित धीरज के परिवार को जब इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली, तो उन्होंने हार नहीं मानी। काफी मशक्कत के बाद गठित एक मेडिकल बोर्ड ने बिजली देवी की सिटी स्कैन फिल्म की जांच की, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। यह फिल्म किसी और मरीज की पाई गई, जिसके बाद उनके नाम से जारी जख्म प्रतिवेदन को तुरंत खारिज कर दिया गया।
हालांकि, इस बड़े मेडिकल फ्रॉड के दोषियों पर तुरंत कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पीड़ित परिवार और भी विचलित हुआ। लेकिन, न्याय की उनकी लड़ाई जारी रही। आखिरकार, 22 मई 2024 को इस घटना में संलिप्त डॉक्टर विजय कुमार, मुखिया श्रवण ठाकुर, स्कैनिंग सेंटर के मालिक और कई अन्य लोगों के खिलाफ एक नई प्राथमिकी दर्ज की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया
आरोपी लक्ष्मण झा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस गिरफ्तारी से उम्मीद जगी है कि इस प्रकार के फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा और न्याय की जीत होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

