
Ambassador to China: भारत की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, ऐसे में जब भारत और चीन के बीच रिश्ते बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं, सरकार ने एक अनुभवी राजनयिक विक्रम दोराईस्वामी को चीन में भारत का नया राजदूत नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश पूर्वी लद्दाख में तनाव के बाद अपने संबंधों को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
# चीन में भारत के नए Ambassador to China: जानिए कौन हैं विक्रम दोराईस्वामी और उनका राजनयिक सफर
भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर पूर्वी लद्दाख में हुए गतिरोध के बाद रिश्तों में खटास साफ तौर पर देखी गई थी। अब दोनों राष्ट्र धीरे-धीरे संबंधों को सामान्य करने की दिशा में बढ़ रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में बीजिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा, यह एक बेहद अहम फैसला माना जा रहा था।
## भारत-चीन संबंधों में अहम मोड़: नए Ambassador to China की भूमिका
विक्रम दोराईस्वामी का चयन उनकी गहरी समझ और व्यापक अनुभव को दर्शाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में मास्टर्स की पढ़ाई करने वाले दोराईस्वामी को अपनी पढ़ाई के दौरान ही विभिन्न देशों और उनके इतिहास को समझने में विशेष रुचि थी। सरकारी सेवा में आने से पहले, उन्होंने पत्रकार के रूप में भी कुछ समय काम किया, जिसने उन्हें समाज और दुनिया को करीब से देखने और समझने का अनूठा अनुभव प्रदान किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
साल 1992 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में शामिल होने के बाद, दोराईस्वामी ने नई दिल्ली में कूटनीति की गहन बारीकियां सीखीं। उनकी पहली बड़ी विदेशी पोस्टिंग 1994 में हांगकांग में हुई, जहाँ वे तीसरे सचिव के पद पर तैनात थे। उनका यह शुरुआती Diplomatic Career उन्हें अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की जटिलताओं से परिचित कराने वाला साबित हुआ।
हांगकांग में रहते हुए, उन्होंने चीनी भाषा सीखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। चीनी विश्वविद्यालय हांगकांग के भाषा केंद्र में पढ़ाई कर उन्होंने चीनी भाषा पर अच्छी पकड़ बनाई। यह कदम उनके करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि आगे चलकर उन्हें चीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को संभालने का अवसर मिला।
उन्हें साल 1996 में बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में भेजा गया था, जहाँ उन्होंने लगभग चार साल तक काम किया। इस दौरान उन्होंने चीन की राजनीति, समाज और उसकी कार्यप्रणाली को गहराई से समझा। चीन जाने से पहले विक्रम दोराईस्वामी यूनाइटेड किंगडम में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने भारत और ब्रिटेन के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/education/
## विक्रम दोराईस्वामी: अनुभव और कूटनीति का मिश्रण
दोराईस्वामी का यह अनुभव उन्हें चीन में भारत के हितों की प्रभावी ढंग से वकालत करने के लिए अच्छी तरह से तैयार करता है। उनकी पिछली भूमिकाओं में भूटान में राजदूत, दक्षिण कोरिया में राजदूत, और विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अंतर्राष्ट्रीय संगठन और शिखर सम्मेलन) जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। उनका व्यापक Diplomatic Career और क्षेत्रीय विशेषज्ञता उन्हें इस संवेदनशील पद के लिए आदर्श उम्मीदवार बनाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि वे दोनों देशों के बीच संवाद को सुगम बनाएंगे और रिश्तों में स्थिरता लाने में मदद करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

